सरिंदा वादन के दिग्गज कलाकार पद्मश्री मंगला कांत राय का निधन, लोक संस्कृति जगत में शोक
उत्तर बंगाल की समृद्ध लोकसंस्कृति को नई पहचान दिलाने वाले सरिंदा वादन के दिग्गज कलाकार और पद्मश्री सम्मानित मंगला कांत राय का गुरुवार देर रात निधन हो गया। 104 वर्ष की आयु में उन्होंने जलपाईगुड़ी जिले के मयनागुड़ी स्थित धवलागुड़ी गांव में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से लोक संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
परिवार के अनुसार, मंगला कांत राय लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों और गले की समस्या से जूझ रहे थे। करीब एक महीने पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जलपाईगुड़ी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अस्पताल में रहने की इच्छा न होने के कारण उन्हें वापस घर ले आया गया था। पिछले कुछ दिनों में उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई।
500 साल पुरानी लोक परंपरा के प्रमुख संरक्षक थे मंगला कांत राय
मंगला कांत राय उत्तर बंगाल की लगभग 500 वर्ष पुरानी लोकसंस्कृति के प्रमुख वाहकों में गिने जाते थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सरिंदा वादन जैसी विलुप्तप्राय लोक कला को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया।
उनके अथक प्रयासों की बदौलत सरिंदा वादन को एक बार फिर सांस्कृतिक मंचों और लोक आयोजनों में पहचान मिली। लोक कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने उनके निधन को लोक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
पद्मश्री और बंगरत्न से हुए सम्मानित
लोक कला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने वर्ष 2017 में उन्हें ‘बंगरत्न’ सम्मान से नवाजा था। इसके बाद भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया।
गांव में शोक, अंतिम इच्छा के अनुसार होगा अंतिम संस्कार
शुक्रवार सुबह उनके निधन की खबर फैलते ही धवलागुड़ी गांव में शोक का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
परिवार ने बताया कि मंगला कांत राय की अंतिम इच्छा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार घर के पास स्थित निजी जमीन पर किया जाएगा। उनके निधन के साथ उत्तर बंगाल की लोक परंपरा ने अपना एक अनमोल सितारा खो दिया है।
