आकांक्षा योजना पर इंदौर में छात्राओं का प्रदर्शन, 24 महीने की कोचिंग का वादा अधूरा होने का आरोप

Indore में प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी आकांक्षा योजना को लेकर आदिवासी छात्राओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। योजना का लाभ नहीं मिलने और कोचिंग व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में छात्राएं कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गईं।

प्रदर्शन कर रही छात्राओं का आरोप है कि उन्हें एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए 24 महीने की कोचिंग का आश्वासन दिया गया था, लेकिन केवल 9 महीने बाद ही कोचिंग व्यवस्था लगभग बंद जैसी स्थिति में पहुंच गई। छात्राओं का कहना है कि इससे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।

धरने पर बैठीं छात्राओं ने बताया कि वे आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं और मेडिकल व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पूरी तरह आकांक्षा योजना पर निर्भर थीं। उनका कहना है कि समय पर कोचिंग, अध्ययन सामग्री और अन्य सुविधाएं नहीं मिलने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। इंदौर में ही 130 से अधिक छात्र इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आने की बात कही जा रही है।

कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करती रहीं। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल भी तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था के कारण उनके करियर के साथ अन्याय हो रहा है।

छात्राओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और जल्द समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, वे आंदोलन जारी रखेंगी।

वहीं, विभाग के सहायक आयुक्त Narendra Bhide ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लिखित रूप में वरिष्ठ अधिकारियों तक भेजा जा रहा है और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल छात्राओं का प्रदर्शन जारी है और वे प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही हैं।

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