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गुजरात में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शुरू, ग्रीन एनर्जी में भारत ने रचा इतिहास

Gujarat ने ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Adani Green Energy Limited ने कच्छ सीमा पर स्थित खवड़ा में 3.37 गीगावाट/घंटे (GWh) क्षमता वाला बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) शुरू कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि चीन को छोड़कर यह दुनिया का सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट है।

यह प्रोजेक्ट सौर और पवन ऊर्जा से उत्पादित बिजली को स्टोर करने में सक्षम है, जिसे जरूरत पड़ने पर शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सप्लाई किया जा सकेगा। इस स्टोरेज सिस्टम की क्षमता इतनी है कि इससे पूरे गोवा, इंदौर या चंडीगढ़ जैसे शहरों अथवा करीब 10 लाख घरों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है।

जानकारी के अनुसार, यह सिस्टम रिकॉर्ड 10 महीनों में तैयार किया गया है। इसकी ऊर्जा क्षमता करीब 1.2 करोड़ एलईडी बल्बों को लगातार 10 घंटे तक जलाए रखने के बराबर बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बड़े ऊर्जा भंडारण सिस्टम नवीकरणीय ऊर्जा के स्थिर उपयोग और बिजली आपूर्ति को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

खवड़ा प्रोजेक्ट का कुल क्षेत्रफल करीब 538 वर्ग किलोमीटर बताया गया है, जो आकार में Paris शहर से लगभग पांच गुना बड़ा है। यहां दुनिया का सबसे बड़ा 30 गीगावॉट क्षमता वाला रिन्यूएबल एनर्जी पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसमें से 9.9 गीगावॉट क्षमता पहले ही चालू हो चुकी है।

रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में फिलहाल China सबसे आगे माना जाता है। चीन के इनर मंगोलिया और शिनजियांग प्रांतों में दुनिया के सबसे बड़े बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं। इनमें छगन हाडा प्रोजेक्ट की क्षमता करीब 4,000 मेगावॉट/घंटा बताई जाती है, जो अत्यधिक ठंडे मौसम में भी कार्य करने में सक्षम है।

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