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बलूचिस्तान में घर तोड़े जाने के आरोपों पर बढ़ा विवाद, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल

बलूचिस्तान में घरों को ध्वस्त किए जाने के आरोपों पर बढ़ा विवाद, मानवाधिकार संगठन ने उठाए सवाल

Balochistan के अवारान जिले में कथित सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिकों के घरों को ध्वस्त किए जाने के आरोपों ने मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक बलूच मानवाधिकार संगठन ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे आम नागरिकों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का हिस्सा बताया है।

अवारान जिले में बुलडोजर कार्रवाई के आरोप

मानवाधिकार संगठन के अनुसार, 13 मई को अवारान जिले के पीर मशकई और कल्लार क्षेत्र में कथित अभियान के दौरान दो स्थानीय निवासियों के घर बुलडोजर से गिरा दिए गए। संगठन का आरोप है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, जहां परिवारों को दबाव, संपत्ति नुकसान और कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इस मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

लापता लोगों को लेकर भी बढ़ी चिंता

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हाल के दिनों में दो लोगों के कथित रूप से लापता होने की घटनाओं ने स्थानीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। इनमें एक छात्र और एक प्रवासी चालक का नाम शामिल बताया गया है।

मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को स्पष्ट जानकारी मिल सके।

गोलीबारी में बुजुर्ग की मौत का दावा

इसी बीच केच जिले में गोलीबारी की एक अलग घटना में एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आई है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि घटना सुरक्षा अभियान के दौरान हुई, हालांकि परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग

मानवाधिकार संगठनों ने United Nations और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है। साथ ही स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो गई है, ताकि घटनाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

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