नेपाल पर FATF की सख्ती! ब्लैक लिस्ट की चेतावनी, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में प्रगति पर जताई नाराजगी

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने नेपाल को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण रोकने में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाने पर ‘ब्लैक लिस्ट’ में डालने की चेतावनी दी है। एफएटीएफ के एशिया-प्रशांत समूह (APG) ने नेपाल सरकार की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि सुधारों की रफ्तार बेहद निराशाजनक रही है।

सितंबर 2026 की समीक्षा से पहले नेपाल पर बढ़ा दबाव

एफएटीएफ से जुड़े एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) ने स्पष्ट किया है कि सितंबर 2026 में होने वाली निर्णायक समीक्षा से पहले यह नेपाल के लिए अंतिम उच्चस्तरीय हस्तक्षेप है। ऐसे में नेपाल के पास आवश्यक सुधार लागू करने के लिए अब चार महीने से भी कम समय बचा है।

काठमांडू में सोमवार से शुरू हुई तीन दिवसीय एपीजी बैठक में नेपाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों से जुड़े मामलों की समीक्षा की जा रही है।

नेपाल की प्रगति पर एपीजी ने जताई असंतुष्टि

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एपीजी ने अपने उपकार्यकारी सचिव डेविड सैनन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल नेपाल भेजा है। विशेषज्ञ इसे नेपाल की वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत मान रहे हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, नेपाल राष्ट्र बैंक, नेपाली सेना, नेपाल प्रहरी और सम्पत्ति शुद्धीकरण अनुसंधान विभाग सहित कई सरकारी निकायों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एपीजी ने नेपाल की कार्यप्रणाली और सुधारों की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त किया।

2025 में ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ था नेपाल

उल्लेखनीय है कि 21 फरवरी 2025 को FATF ने नेपाल को दो वर्षों के लिए ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था। संस्था ने नेपाल को 15 सुधार बिंदुओं पर काम करने और 2027 तक उन्हें पूरा करने का लक्ष्य दिया था। हालांकि मौजूदा प्रगति को देखते हुए यह लक्ष्य मुश्किल नजर आ रहा है।

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले लगातार कह रहे हैं कि देश को ग्रे लिस्ट से बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका मानना है कि ग्रे लिस्ट में बने रहने से विदेशी निवेश और आर्थिक छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है।

किन मामलों में पिछड़ रहा नेपाल?

एपीजी की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल नीतिगत हस्तक्षेप, कानून लागू करने, जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने, जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी और दोषियों पर कार्रवाई जैसे कई अहम क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाया है।

मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अब तक विभिन्न एजेंसियों द्वारा सीमित संख्या में केस दर्ज किए गए हैं। एपीजी ने इन आंकड़ों को नाकाफी बताते हुए जटिल वित्तीय अपराधों में ठोस कार्रवाई की कमी पर सवाल उठाए हैं।

क्या होती है FATF की ग्रे और ब्लैक लिस्ट?

FATF की ग्रे लिस्ट में वे देश शामिल होते हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा पाते, लेकिन सुधार की प्रक्रिया में होते हैं।

वहीं, ब्लैक लिस्ट में शामिल होने का मतलब होता है कि किसी देश को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में गंभीर प्रतिबंधों और निवेश संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे विदेशी निवेश, बैंकिंग लेनदेन और आर्थिक विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ता है।

नेपाल इससे पहले 2011 में ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ था और 2014 में सफलतापूर्वक बाहर निकलने में कामयाब रहा था। अब एक बार फिर देश पर वैश्विक वित्तीय दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

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