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रामनगर में आज से ‘आदि उत्सव 2026’ का आगाज, गोंडवाना संस्कृति और जनजातीय विरासत का दिखेगा भव्य संगम

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल मंडला जिले की ऐतिहासिक नगरी रामनगर में आज शुक्रवार से दो दिवसीय ‘आदि उत्सव 2026’ की भव्य शुरुआत होने जा रही है। गोंडकालीन राजाओं की राजधानी रहे रामनगर में आयोजित यह महोत्सव जनजातीय संस्कृति, गोंडवाना इतिहास, पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम बनेगा।

इस भव्य आयोजन का शुभारंभ केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री Jual Oram दोपहर 12:30 बजे करेंगे। आयोजन ऐतिहासिक चौगान मढ़िया और रामनगर महल परिसर में किया जा रहा है, जहां देशभर से जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, राज परिवारों के सदस्य, लोक कलाकार और संस्कृति प्रेमी शामिल होंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 11 बजे ध्वजारोहण और पारंपरिक विधि-विधान से आदि उत्सव का शुभारंभ होगा। इसके बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर, स्मारक स्थल पर झंडा पूजन, नर्मदा पूजन, प्रदर्शनी अवलोकन और महल परिसर में विशेष पूजन-अर्चन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन में गोंडवाना संस्कृति और जनजातीय परंपराओं की विशेष झलक देखने को मिलेगी।

दोपहर 12:20 बजे से मंचीय कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन, अतिथियों का स्वागत और सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान आदिवासी रियासतों के प्रतिनिधियों, विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाली जनजातीय प्रतिभाओं और पंडा-पुजारियों का सम्मान किया जाएगा।

उत्सव में उत्तर-पूर्व भारत, मध्य भारत और प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। साथ ही गोंड, बैगा और अन्य जनजातीय समुदायों के लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक कला प्रदर्शन देर रात तक आयोजित होंगे, जो दर्शकों को जनजातीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएंगे।

आयोजन में कई राजपरिवारों के सदस्य भी शामिल होंगे, जो गोंडवाना की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देने के उद्देश्य से रामनगर पहुंचेंगे। दूसरे दिन यानी 16 मई को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका विशेष रूप से शामिल होंगे। साथ ही जनजातीय साहित्य, इतिहास और संस्कृति पर आधारित विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के कई प्रसिद्ध विद्वान, इतिहासकार और शोधकर्ता भाग लेंगे।

प्रशासन की ओर से आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। ‘आदि उत्सव 2026’ को गोंडवाना संस्कृति, इतिहास और जनजातीय अस्मिता के महापर्व के रूप में देखा जा रहा है, जो मध्य प्रदेश की समृद्ध आदिवासी परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा।

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