होर्मुज में बढ़ा तनाव: अमेरिका-ईरान टकराव तेज, शांति प्रयासों को लगा झटका

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं। युद्ध टालने और तनाव कम करने के हालिया कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” करार दिया है, जबकि ईरान ने अमेरिका और इजराइल को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने टकराव रोकने के लिए कुछ शर्तें रखी थीं, जिनमें नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, प्रतिबंध समाप्त करना और परमाणु कार्यक्रम व विदेश नीति में अमेरिकी दखल खत्म करना शामिल था। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इन मांगों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पढ़ी है और यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पिछले कई दशकों से अमेरिका और वैश्विक समुदाय के साथ खेल खेलता रहा है। ट्रंप ने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में इस समझौते को मंजूरी नहीं दी थी।
वहीं, ईरानी सेना ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां दोबारा शुरू हुईं, तो दोनों देशों को “कल्पना से परे चुनौती” का सामना करना पड़ेगा। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फ्रांस और ब्रिटेन की संभावित भूमिका को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि यदि कोई देश अमेरिका की कथित गैरकानूनी कार्रवाइयों का समर्थन करता है, तो ईरानी सशस्त्र बल तत्काल और निर्णायक जवाब देंगे।
इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय पहल सैन्य तैनाती नहीं होगी, बल्कि इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाना है। दूसरी ओर ब्रिटिश रॉयल नेवी ने घोषणा की है कि एचएमएस ड्रैगन युद्धपोत को इस सप्ताह मध्य पूर्व में तैनात किया जाएगा, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर नजर रखी जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है और यहां तनाव बढ़ने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच शांति की संभावनाएं कमजोर नजर आ रही हैं, जबकि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं।






