17 मई से शुरू होगा ज्येष्ठ अधिक मास: क्यों आता है अधिक मास और इस महीने में कौन-कौन से शुभ कार्य किए जाते हैं?

सनातन धर्म में अधिक मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होने जा रही है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

क्यों आता है अधिक मास?

हिन्दू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति के अनुसार चलता है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। यही अंतर हर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हिन्दू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

अधिक मास का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास भगवान Vishnu को समर्पित माना जाता है। इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत, कथा, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है। कई श्रद्धालु इस दौरान गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम और रामचरितमानस का पाठ भी करते हैं।

अधिक मास में कौन-कौन से शुभ कार्य करें?

अधिक मास को आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य कमाने का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान निम्न कार्य करना शुभ माना जाता है—

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की नियमित पूजा
  • गंगा स्नान और तीर्थ यात्रा
  • गरीबों एवं जरूरतमंदों को दान
  • व्रत और सत्संग में भाग लेना
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ
  • तुलसी पूजा और दीपदान
  • गौ सेवा और अन्नदान

किन कार्यों से बचना चाहिए?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। हालांकि पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए यह महीना अत्यंत शुभ माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक अधिक मास आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का समय होता है। इस दौरान किए गए पुण्य कार्यों का कई गुना फल मिलने की मान्यता है।

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