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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पीछे हटेंगे अमेरिकी जहाज, शांति वार्ता में अविश्वास; इजराइली हमले में लेबनानी पत्रकार की मौत

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बड़ा फैसला लेते हुए नाकाबंदी में शामिल दो और अमेरिकी जहाजों को वापस लौटने का निर्देश दिया है। अब तक कुल 31 जहाजों को पीछे हटने के लिए कहा जा चुका है।

यह फैसला उस समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संघर्ष विराम बढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान शांति वार्ता की मेज पर लौटने को तैयार नहीं है। ईरान ने साफ कहा है कि उसे अमेरिकी नेतृत्व के वादों पर भरोसा नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 13 अप्रैल से जारी इस नाकाबंदी में 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक, 17 युद्धपोत और 100 से ज्यादा विमान शामिल हैं। अधिकांश जहाज चाबहार पोर्ट के आसपास तैनात हैं।

ईरान ने इस गतिरोध के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि बंदरगाहों की घेराबंदी और लगातार दबाव के कारण वार्ता प्रक्रिया बाधित हुई है।

इस बीच ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों को अपने कब्जे में लिया है और समुद्री नियमों के उल्लंघन पर एक अन्य जहाज पर गोलीबारी की है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन “वादाखिलाफी, घेराबंदी और धमकियां” सच्ची वार्ता में सबसे बड़ी बाधा हैं।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट के अनुसार, संघर्ष विराम की अवधि को लेकर कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है और यह पूरी तरह राष्ट्रपति के निर्णय पर निर्भर करेगा।

इसी बीच क्षेत्र में हिंसा की एक और घटना सामने आई है। इजराइल के हमले में लेबनान की पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई। इस घटना की लेबनान ने कड़ी निंदा की है और इसे लक्षित हमला बताया है।

मौजूदा हालात में पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे न सिर्फ शांति वार्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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