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AI ने खोला सालों पुरानी बीमारी का राज, डॉक्टर करते रहे गलत इलाज

एक 23 साल की युवती, जिसे सालों तक अलग-अलग बीमारियों का मरीज बताया गया, आखिरकार अपनी असली बीमारी का पता खुद लगाया — वो भी ChatGPT की मदद से।

🔍 क्या है पूरा मामला?

Cardiff की 23 साल की फोएबी टेसोरिएरे बचपन से ही चलने और संतुलन की समस्या से जूझ रही थीं। शुरुआत में इसे सामान्य समझा गया, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, उनकी दिक्कतें बढ़ती गईं। इसके बावजूद उन्हें सही बीमारी का पता नहीं चल पाया।


⚠️ बार-बार गलत डायग्नोसिस

डॉक्टरों ने अलग-अलग समय पर उन्हें अलग बीमारियों का मरीज बताया।
पहले एंग्जायटी और डिप्रेशन कहा गया, फिर 2022 में एपिलेप्सी का इलाज शुरू कर दिया गया। लेकिन इन सभी इलाजों के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, जिससे साफ था कि असली समस्या कुछ और है।


🚨 हालत कब बिगड़ी?

2025 में फोएबी को एक गंभीर दौरा पड़ा, जिसके बाद वह 3 दिन तक कोमा में रहीं। होश में आने के बाद भी डॉक्टर यह तय नहीं कर पाए कि उन्हें असल में कौन-सी बीमारी है। इसी समय उन्होंने खुद समाधान खोजने का फैसला किया।


🤖 AI कैसे बना मददगार?

फोएबी ने अपने सभी लक्षण ChatGPT में डालकर जानकारी ली।
AI ने संभावित बीमारियों की एक सूची दी, जिसमें एक दुर्लभ बीमारी का नाम सामने आया।


🧬 असली बीमारी क्या निकली?

AI द्वारा सुझाई गई बीमारियों में Hereditary Spastic Paraplegia शामिल थी।
जब फोएबी ने यह जानकारी डॉक्टर को दी, तो जेनेटिक टेस्ट कराया गया और यही बीमारी कन्फर्म हो गई। यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो अक्सर गलत डायग्नोसिस का शिकार होता है।


🏥 सिस्टम पर उठे सवाल

इस पूरे मामले के बाद Cardiff and Vale University Health Board ने खेद जताया।
हालांकि उन्होंने केस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह मामला मेडिकल सिस्टम की सीमाओं को जरूर दिखाता है।


📊 एक्सपर्ट की चेतावनी

University of Oxford की स्टडी के अनुसार AI हर बार सही सलाह नहीं देता।
इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि AI को सिर्फ शुरुआती जानकारी के लिए इस्तेमाल करना चाहिए, अंतिम निर्णय हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट का होना चाहिए।


💔 अब कैसी है फोएबी की जिंदगी?

बीमारी के कारण फोएबी अब व्हीलचेयर पर हैं और उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी।
हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अब Psychology में Masters कर रही हैं, ताकि आगे चलकर लोगों की मदद कर सकें।


⚡ समझने वाली बात (Conclusion)

यह केस दिखाता है कि AI मददगार हो सकता है, लेकिन पूरी तरह भरोसेमंद नहीं।
सही तरीका यह है कि AI से मिली जानकारी को डॉक्टर के साथ मिलाकर समझा जाए।

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