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कॉप-33 की मेजबानी से पीछे हटने पर जयराम रमेश का हमला, सरकार की जलवायु प्रतिबद्धता पर उठाए सवाल

जयराम रमेश ने भारत द्वारा वर्ष 2028 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP33) की मेजबानी से पीछे हटने के फैसले की कड़ी आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने 1 दिसंबर 2023 को दुबई में इस सम्मेलन की मेजबानी करने की घोषणा की थी, लेकिन अब अचानक इस प्रस्ताव को वापस लेना सरकार की जलवायु प्रतिबद्धताओं पर सवाल खड़े करता है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से की गई थी, ठीक उसी तरह जैसे जी20 शिखर सम्मेलन 2023 का आयोजन किया गया था।

उन्होंने कहा कि बिना स्पष्ट कारण बताए इस फैसले से पीछे हटना 2015 के पेरिस समझौता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करता है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्यों को लेकर सरकार की गंभीरता पर भी प्रश्न उठते हैं।

रमेश के अनुसार, वर्ष 2028 तक जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल की सातवीं आकलन रिपोर्ट आने की संभावना है। ऐसे में COP33 की अध्यक्षता भारत के लिए वैश्विक स्तर पर जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होती।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन के तहत आयोजित होने वाला COP सम्मेलन दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक जलवायु मंच है, जहां सदस्य देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए रणनीतियों और नीतियों पर विचार-विमर्श करते हैं।

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय हलकों में बहस तेज हो गई है, और आने वाले समय में सरकार की ओर से इस फैसले पर विस्तृत स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जा रही है।

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