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केंद्र सरकार का बड़ा कदम: उद्योगों के लिए 2.5 लाख करोड़ की स्पेशल क्रेडिट गारंटी स्कीम तैयार

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार भारतीय उद्योगों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की “स्पेशल क्रेडिट गारंटी स्कीम” का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।

यह योजना कोविड-19 काल में लागू की गई Emergency Credit Line Guarantee Scheme की तर्ज पर तैयार की गई है, लेकिन इसका दायरा और बजट उससे कहीं अधिक बड़ा रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्कीम का उद्देश्य उन उद्योगों को वित्तीय सहायता देना है, जो पश्चिम एशिया संकट के कारण प्रभावित हुए हैं। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और सर्विस सेक्टर को बढ़ती लागत और बाधित आपूर्ति के चलते राहत देने की योजना है।

इस योजना के तहत National Credit Guarantee Trustee Company के माध्यम से कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज पर केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी देगी। इसका मतलब है कि यदि कोई कंपनी कर्ज चुकाने में असमर्थ रहती है, तो बैंक को होने वाले नुकसान का अधिकांश हिस्सा सरकार वहन करेगी।

सरकार की इस गारंटी से बैंकों का जोखिम कम होगा और वे अधिक संख्या में जरूरतमंद कंपनियों को कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित होंगे। खास बात यह है कि इस योजना में कंपनियों को अतिरिक्त गारंटी या संपार्श्विक (collateral) देने की आवश्यकता नहीं होगी।

प्रस्ताव के अनुसार, इस योजना की अवधि चार वर्ष रखी गई है। साथ ही कंपनियों को मूलधन चुकाने के लिए एक वर्ष तक की राहत मिल सकती है, हालांकि इस दौरान ब्याज का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

सरकार इस बार राहत पैकेज को केवल MSME सेक्टर तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित सभी क्षेत्रों को इसमें शामिल करने की योजना है। हालांकि, छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए इसमें विशेष प्रावधान रखे जाएंगे, ताकि उन्हें लिक्विडिटी संकट से बचाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल उद्योगों को तत्काल राहत देगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को स्थिर बनाए रखने और रोजगार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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