नया आयकर कानून एवं कई बजटीय प्रावधान एक अप्रैल से होंगे लागू, जानिए क्या होगा बदलाव

नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल से देश में नया आयकर कानून लागू होने जा रहा है। आयकर अधिनियम 2025 करीब छह दशक पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा और टैक्स सिस्टम में कई बड़े बदलाव लाएगा।
एकल ‘कर वर्ष’ की शुरुआत
नए कानून के तहत वित्तीय वर्ष (Financial Year) और आकलन वर्ष (Assessment Year) की जगह एकल ‘कर वर्ष’ (Tax Year) की व्यवस्था लागू की गई है। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।
STT में बढ़ोतरी (F&O ट्रेडिंग महंगी)
वायदा एवं विकल्प (F&O) सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) बढ़ाया गया है।
- वायदा (Futures): 0.02% → 0.05%
- विकल्प प्रीमियम: 0.1% → 0.15%
- विकल्प एक्सरसाइज: 0.125% → 0.15%
इसका उद्देश्य सट्टेबाजी को कम करना और छोटे निवेशकों को नुकसान से बचाना है।
TCS में राहत (विदेश यात्रा सस्ती)
विदेश यात्रा और एलआरएस के तहत भेजी जाने वाली रकम पर टीसीएस घटाया गया है:
- विदेशी टूर पैकेज: 20% → 2%
- शिक्षा/चिकित्सा प्रेषण: 5% → 2%
इससे मध्यम वर्ग को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।
डेटा सेंटर कंपनियों को बड़ी राहत
भारत में डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक 20 वर्षों की कर छूट दी जाएगी। इससे भारत में निवेश बढ़ने और डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होने की संभावना है।
आईटी सेक्टर के लिए ‘सेफ हार्बर’ सीमा बढ़ी
आईटी/आईटीईएस कंपनियों के लिए ‘सेफ हार्बर’ सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दी गई है, जिससे ट्रांसफर प्राइसिंग विवाद कम होंगे और उद्योग को स्थिरता मिलेगी।
लेट ITR पर राहत
अब समय सीमा के बाद आयकर रिटर्न दाखिल करने पर भी टीडीएस रिफंड बिना किसी दंड शुल्क के प्राप्त किया जा सकेगा।
अन्य अहम बातें
- ई-फाइलिंग पोर्टल पुराने और नए दोनों कानूनों के तहत अनुपालन की सुविधा देगा
- पुराने वर्षों के मामलों की सुनवाई पुराने कानून के तहत ही जारी रहेगी
- कर वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स जून से शुरू होगा
इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाना है, जिससे आम करदाताओं से लेकर कॉरपोरेट सेक्टर तक सभी को लाभ मिल सके।






