नेपाल में जेन जी आंदोलन के बाद जले सरकारी भवन अब भी खंडहर, पुनर्निर्माण शुरू नहीं

नेपाल में पिछले वर्ष सितंबर में हुए जेन जी आंदोलन के दौरान आगजनी में क्षतिग्रस्त सरकारी भवनों का पुनर्निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। करीब छह महीने बीत जाने के बावजूद कई प्रमुख प्रशासनिक ढांचे अब भी जर्जर हालत में खड़े हैं, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रमुख भवन अब भी क्षतिग्रस्त
देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिसर सिंहदरबार में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय और कई मंत्रालयों के भवन अब भी मरम्मत की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इसके अलावा—
- प्रधानमंत्री आवास
- राष्ट्रपति भवन शीतल निवास
- सर्वोच्च अदालत
- अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (वर्तमान संसद भवन)
भी आग के निशानों के साथ खड़े हैं।
संसद भवन निर्माण भी अधूरा
नए संसद भवन का निर्माण कार्य भी समय पर पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में 26 मार्च को सांसदों को अस्थायी हॉल में शपथ दिलाई जाएगी।
2019 में शुरू हुई इस परियोजना का काम अभी तक केवल 90-92% ही पूरा हो पाया है, जबकि इसमें संसद कक्ष, वीवीआईपी क्षेत्र और उच्च पदाधिकारियों के कार्यालय शामिल हैं।
भारी नुकसान के आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- 629 भवन पूरी तरह नष्ट
- 560 से अधिक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
- 310 सरकारी कार्यालय पूरी तरह ध्वस्त
पुलिस के 177 भवन पूरी तरह अनुपयोगी हो गए थे, जबकि 258 को मरम्मत योग्य बताया गया।
सीमित मरम्मत कार्य
शहरी विकास विभाग के अनुसार—
- 166 हल्के क्षतिग्रस्त भवनों में से 54 का उपयोग शुरू
- 34 की मरम्मत जारी
- 28 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त भवनों को पूर्ण पुनर्निर्माण की आवश्यकता
सरकार की निष्क्रियता पर सवाल
भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के अनुसार अब तक पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्रालय के अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि इस संबंध में सरकार से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नुकसान के बावजूद पुनर्निर्माण में देरी नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
यह स्थिति प्रशासनिक अक्षमता और नीति स्तर पर देरी को उजागर करती है, जिससे देश के बुनियादी ढांचे और शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।






