तेहरान को वाशिंगटन का संदेश: ट्रंप समझौते को तैयार, ईरान ने दिए सकारात्मक संकेत

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित वार्ता के संकेत सामने आए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, तेहरान को मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन से एक महत्वपूर्ण संदेश मिला है, जिसे बातचीत की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारी ने कहा कि उन्हें अमेरिका की ओर से “कुछ सार्थक संकेत” मिले हैं और उनकी समीक्षा की जा रही है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया था कि दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म करने को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच करीब 15 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान शांति चाहता है और बातचीत के लिए तैयार है। खास बात यह है कि ट्रंप ने हाल ही में ईरान को दी गई सख्त चेतावनी—जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोलने पर हमले की बात कही गई थी—को वापस ले लिया है।

हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने पहले ऐसी किसी भी बातचीत से इनकार किया था, लेकिन अब ट्रंप के बयानों के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि सैन्य संघर्ष कम हो सकता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि ईरान और अमेरिका के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, फिर भी दोनों देश ऐतिहासिक रूप से मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत करते रहे हैं।

ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका ईरान के एक शीर्ष अधिकारी के साथ संपर्क में है, हालांकि उन्होंने उस व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमत हो गया है, जबकि पहले वह यूरेनियम संवर्धन रोकने के प्रस्ताव को खारिज करता रहा है।

इस बीच यह स्पष्ट नहीं है कि इजराइल किसी संभावित समझौते का हिस्सा होगा या नहीं। गौरतलब है कि 28 फरवरी से अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए गए थे, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया आकलन में पाया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कई ईरानी बारूदी सुरंगें मौजूद हैं। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि युद्ध शुरू होने के बाद से 9,000 से अधिक ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिनमें 140 से ज्यादा नौसैनिक जहाज शामिल हैं।

मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता आगे बढ़ती है, तो यह पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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