स्वाति मालिवाल ने संसद में उठाया महिला आयोगों में खाली पदों का मुद्दा, दिल्ली आयोग बहाल करने की मांग

राज्यसभा सांसद स्वाति मालिवाल ने सोमवार को संसद में देशभर के महिला आयोगों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने शून्यकाल के दौरान मुद्दा उठाते हुए दिल्ली महिला आयोग को तुरंत पुनः शुरू करने और सभी राज्यों में खाली पड़े पदों को भरने की मांग की।
महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल
संसद में बोलते हुए मालिवाल ने कहा कि भारत में हर 15 मिनट में एक महिला के साथ दुष्कर्म होता है और यह आंकड़े केवल दर्ज मामलों के हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति इससे भी अधिक चिंताजनक हो सकती है।
महिला आयोगों की स्थिति पर चिंता
उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में महिला आयोगों की स्थापना की गई थी, लेकिन आज भी इन संस्थाओं के पास पर्याप्त अधिकार, स्वतंत्र फंडिंग और स्वायत्तता का अभाव है। कई संसदीय समितियों ने इस पर चिंता जताई है, लेकिन ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं।
राज्यों में हजारों मामले लंबित
मालिवाल ने विभिन्न राज्यों की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि झारखंड महिला आयोग जून 2020 से बंद है, जहां 4,000 से अधिक मामले लंबित हैं। वहीं मध्य प्रदेश महिला आयोग में अध्यक्ष का पद पिछले 6 वर्षों से खाली है, जिससे करीब 26,000 मामले लंबित हैं।
दिल्ली महिला आयोग पर खास फोकस
दिल्ली महिला आयोग की स्थिति पर उन्होंने विशेष चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से आयोग बंद पड़ा है, जहां न अध्यक्ष है और न ही सदस्य। उन्होंने सवाल उठाया, “जब न्याय देने वाली संस्था ही बंद हो जाए, तो पीड़ित कहां जाए?”
कार्यकाल के अनुभव साझा किए
मालिवाल ने अपने कार्यकाल (2015-2024) के अनुभव साझा करते हुए बताया कि दिल्ली महिला आयोग ने इस दौरान 1.74 लाख मामलों का निपटारा किया और हेल्पलाइन पर 40 लाख कॉल्स प्राप्त हुईं।
उन्होंने कई उदाहरण देते हुए बताया कि आयोग ने एक 14 वर्षीय लड़की को अत्याचार से बचाया और पहाड़गंज में 39 नेपाली लड़कियों को मानव तस्करी से मुक्त कराया।
राजनीतिक कारणों से कमजोर करने का आरोप
मालिवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में दिल्ली महिला आयोग को राजनीतिक कारणों से कमजोर किया गया, फंडिंग रोकी गई और स्टाफ हटाया गया।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि महिला आयोगों को मजबूत कर तुरंत सक्रिय किया जाए, ताकि महिलाओं को न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।






