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नेपाल संसद में युवाओं का दबदबा, 165 में से 60 सांसद 40 वर्ष से कम उम्र के

नेपाल के हालिया प्रतिनिधि सभा चुनाव में युवाओं की मजबूत भागीदारी देखने को मिली है। सोमवार तक घोषित 160 निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों के अनुसार नई संसद में 40 वर्ष से कम उम्र के 60 सांसद निर्वाचित होकर पहुंचे हैं।

हालांकि अभी 110 समानुपातिक सीटों के परिणाम बाकी हैं, जिनमें भी कई युवा नेताओं के संसद में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

संसद की उम्र संरचना में बड़ा बदलाव

नेपाल की कुल आबादी में 16 से 40 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 40.35 प्रतिशत है।

वर्ष 2022 के प्रतिनिधि सभा चुनाव में 165 निर्वाचन क्षेत्रों में से केवल 10 युवा उम्मीदवार (40 वर्ष से कम उम्र) ही जीत पाए थे। उस समय 70 वर्ष से अधिक आयु के 14 सांसद और 40 से 70 वर्ष आयु वर्ग के 138 सांसद निर्वाचित हुए थे।

इस बार के चुनाव परिणामों ने संसद की उम्र संरचना में बड़ा बदलाव दिखाया है और युवाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का दबदबा

40 वर्ष से कम उम्र के 60 सांसदों में से 52 सांसद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) से चुने गए हैं।

इसके अलावा:

  • नेपाली कांग्रेस से 4 सांसद

  • सीपीएन-यूएमएल से 2 सांसद

  • राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और श्रम संस्कृति पार्टी से 1-1 सांसद

निर्वाचित हुए हैं।

25 वर्षीय प्रशांत सबसे युवा सांसद

मकवानपुर–2 से 25 वर्षीय प्रशांत उप्रेती इस बार के सबसे युवा सांसद बने हैं। वे आरएसपी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।

इसके अलावा कई युवा नेता भी संसद में पहुंचे हैं, जिनमें:

  • मनीष खनाल (26) – पूर्वी नवलपरासी–2

  • केपी खनाल (26) – कैलाली–2

  • सुलभ खरेल (28) – रूपन्देही–2

  • बब्लु गुप्ता (28) – सिरहा–1

  • निशा डांगी (29) – झापा–1

शामिल हैं।

इसी तरह सस्मित पोखरेल, रन्जु न्यौपाने, शिवशंकर यादव, सोबिता गौतम, रुबिना आचार्य और सुशांत वैदिक जैसे युवा नेता भी संसद में पहुंचे हैं।

बालेन्द्र शाह भी युवा वर्ग में शामिल

प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार 36 वर्षीय बालेन्द्र शाह (बालेन) भी युवा श्रेणी में आते हैं। उन्होंने झापा–5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को हराकर प्रतिनिधि सभा की सीट जीती है।

वरिष्ठ नेताओं की संख्या घटी

चुनाव परिणामों के अनुसार:

  • 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 36 सांसद निर्वाचित हुए हैं।

  • 60 वर्ष से अधिक आयु के केवल 9 सांसद संसद में पहुंचे हैं।

विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में युवाओं की बढ़ती भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

राजनीतिक विश्लेषक सुचेता प्याकुरेल के अनुसार नेपाल की राजनीति में युवाओं का प्रतिनिधित्व धीरे-धीरे बढ़ रहा है। वहीं युवा विश्लेषक नवीन तिवारी का कहना है कि केवल उम्र के आधार पर बड़े बदलाव की उम्मीद करना सही नहीं होगा।

उनका कहना है कि राजनीति में उम्र से ज्यादा महत्वपूर्ण नेतृत्व की नीयत, ईमानदारी और स्पष्ट दृष्टि होती है, जो समाज पर वास्तविक प्रभाव डालती है।

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