पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर के करीब पहुंचा

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में जारी संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 113 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा।
सात दिनों में 55 प्रतिशत से अधिक की तेजी
पिछले एक सप्ताह के दौरान वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में 55 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड ने 107.92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार शुरू किया और कुछ ही समय में बढ़कर 119.14 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारतीय समयानुसार सुबह 11 बजे तक ब्रेंट क्रूड 115.57 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो करीब 24.69 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है।
इसी तरह WTI क्रूड ने 107.81 डॉलर प्रति बैरल से कारोबार शुरू किया और बढ़कर 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाद में इसमें हल्की गिरावट आई और सुबह 11 बजे तक यह 113.65 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
सप्लाई बाधित होने से बढ़ी कीमतें
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते सप्लाई में बाधा और तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती है।
ओपेक प्लस समूह के सदस्य इराक ने अपने तीन बड़े दक्षिणी ऑयल फील्ड्स से उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत कटौती कर दी है। पहले इन क्षेत्रों से रोजाना 43 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता था, जो अब घटकर 13 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है।
वहीं कुवैत ने भी तेल उत्पादन में कटौती का ऐलान किया है, हालांकि कटौती की सटीक मात्रा अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का असर
तेल की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमले भी हैं।
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने यूएई, कुवैत और बहरीन के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
भारत पर पड़ सकता है असर
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने पर भारत के आयात बिल में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही तो भारत में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही महंगे आयात के कारण विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय घाटे पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।






