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पश्चिम एशिया संकट का असर: डॉलर के मुकाबले 92.35 तक गिरा रुपया, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची भारतीय मुद्रा

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। इसी के चलते भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.35 रुपये प्रति डॉलर तक गिर गया है।

सोमवार को इंटर बैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपये ने बड़ी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। भारतीय मुद्रा ने सुबह 46 पैसे की कमजोरी के साथ 92.20 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से ट्रेडिंग शुरू की।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर

बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया। इससे बाजार का सेंटीमेंट नकारात्मक हो गया और रुपया 61 पैसे गिरकर 92.35 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि इसके बाद रुपये में हल्का सुधार भी देखने को मिला। दोपहर एक बजे तक के कारोबार में भारतीय मुद्रा 52 पैसे की गिरावट के साथ 92.26 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करती नजर आई।

पाउंड और यूरो के मुकाबले भी कमजोर

मुद्रा बाजार में रुपये ने केवल डॉलर ही नहीं बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले भी कमजोरी दिखाई।

दोपहर एक बजे तक के कारोबार के बाद:

  • ब्रिटिश पाउंड (GBP) के मुकाबले रुपया 81.95 पैसे गिरकर 123.06 के स्तर पर पहुंच गया।

  • वहीं यूरो के मुकाबले रुपया 41.40 पैसे की गिरावट के साथ 106.61 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और वैश्विक बाजार में अस्थिरता की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ गया है।

यदि तेल की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रहती है तो आने वाले दिनों में भारतीय मुद्रा और दबाव में आ सकती है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है

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