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अवैध हॉस्पिटलों पर हाईकोर्ट सख्त, स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर असंतोष; 2 हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने के आदेश

इंदौर शहर में संचालित हो रहे अवैध हॉस्पिटलों को लेकर इंदौर उच्च न्यायालय में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई डबल बेंचजस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी—के समक्ष हुई, जहां स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।

सुनवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) इंदौर माधव हासानी स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि अवैध हॉस्पिटलों की जांच के लिए 8 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी, जिसमें
डॉ. अभिषेक निगम, डॉ. वीरेंद्र राजगीर, डॉ. निर्मला अखंड, डॉ. हिमांशु सुमन, सुश्री मयूरी जाट, सुश्री शैफाली बर्डे, दारासिंह वास्केल और सुश्री पंकज वाडबूदे शामिल थे।

हालांकि CMHO ने न्यायालय को बताया कि समिति द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट से वे संतुष्ट नहीं हैं। इसके चलते संबंधित समिति सदस्यों को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने न्यायालय से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा।

याचिकाकर्ता की ओर से गंभीर आरोप

याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल, जयेश गुरनानी और आदित रघुवंशी ने न्यायालय को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा पहले ही CMHO को जांच के निर्देश दिए जा चुके थे, इसके बावजूद जानबूझकर विलंब किया जा रहा है।

अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई हॉस्पिटल संचालकों द्वारा कूट-रचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर अस्पताल संचालन की अनुमति प्राप्त की गई है, जिससे मरीजों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है।

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश

उभय पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट आदेश दिए। साथ ही नगर पालिका निगम इंदौर को भी इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तय समय सीमा में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम क्या कदम उठाते हैं।

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