भारत की नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में तेज़ प्रगति, वैश्विक नवाचार सूचकांक में 66वें से 38वें स्थान पर पहुंचा भारत

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में बीते कुछ वर्षों में मजबूत और स्थिर प्रगति हुई है। इसके परिणामस्वरूप भारत ने वैश्विक नवाचार सूचकांक में वर्ष 2019 के 66वें स्थान से छलांग लगाकर वर्ष 2025 में 38वां स्थान हासिल किया है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, विनिर्माण, अनुसंधान, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सरकार द्वारा की गई पहल ने भारत को नवाचार और औद्योगिक विकास के उभरते वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नीति सुधारों और निवेश-अनुकूल वातावरण के कारण भारत में नवाचार आधारित गतिविधियों को नई गति मिली है।
सर्वेक्षण में विशेष रूप से उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) की भूमिका को रेखांकित किया गया है। इस योजना ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया है, खासकर स्मार्टफोन विनिर्माण के क्षेत्र में। कई वैश्विक मोबाइल फोन कंपनियों ने अपना उत्पादन भारत में स्थानांतरित किया है, जिससे देश एक महत्वपूर्ण वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनकर उभरा है।
सितंबर 2025 तक, पीएलआई योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश हो चुका है। इससे 18.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन और बिक्री दर्ज की गई है। साथ ही, इस योजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 12.60 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, जो रोजगार सृजन के लिहाज से भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि भारत अब निम्न मध्यम आय वाले देशों में नवाचार के मामले में अग्रणी बन चुका है और मध्य एवं दक्षिण एशिया क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है। नवाचार के वैश्विक मानचित्र पर बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे शहर दुनिया के शीर्ष 50 नवाचार-प्रधान केंद्रों में शामिल हो चुके हैं।
बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और पेटेंट, ट्रेडमार्क व डिज़ाइन फाइलिंग के मामले में एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रगति आने वाले वर्षों में भारत को नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में और सशक्त बनाएगी।






