ईयू से द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा समझौता कर भारत बना तीसरा एशियाई देश

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर सहमति बनी है। इस समझौते के साथ भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के बाद ईयू के साथ सुरक्षा व रक्षा साझेदारी करने वाला तीसरा एशियाई देश बन गया है। यह कदम भारत-ईयू संबंधों को रणनीतिक रूप से नई ऊंचाई देता है।
गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत आईं ईयू आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस डील को “बड़ा कदम” बताते हुए कहा कि भारत और ईयू लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं। यह समझौता तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में स्थिरता, सतत विकास और समावेशी समृद्धि को बढ़ावा देगा।
समझौते के प्रमुख क्षेत्र:
Maritime Security (समुद्री सुरक्षा): खुले और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना
Cyber Security (साइबर सुरक्षा): डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा
Counter-Terrorism (आतंकवाद विरोध): वैश्विक आतंकी खतरों से संयुक्त मुकाबला
Defense Industry Cooperation: तकनीक साझा करना और सह-विकास
यह समझौता पारंपरिक खरीद-आधारित रक्षा संबंधों से आगे बढ़कर भारत को तकनीकी साझेदार और संभावित रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करता है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका को ईयू के लिए एक मुख्य रणनीतिक स्तंभ के रूप में और मजबूती मिलेगी।
रक्षा मंत्री ने गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) में ईयू के एक लायजन ऑफिसर की तैनाती के प्रस्ताव का स्वागत किया, जिससे समुद्री डकैती और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बल मिलेगा।
निष्कर्ष:
भारत-ईयू रक्षा समझौता दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक भरोसे, तकनीकी सहयोग और वैश्विक सुरक्षा साझेदारी की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जिससे इंडो-पैसिफिक और वैश्विक सुरक्षा संतुलन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।






