देश के 95% गाँव हुए ODF Plus, तीन वर्षों में 4 गुना से अधिक बढ़ोतरी — स्वच्छता मिशन में बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली।
विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने बताया कि देश के 95 प्रतिशत से अधिक गाँव अब ODF Plus घोषित किए जा चुके हैं। ODF Plus वह स्थिति है जिसमें गाँव न केवल खुले में शौच से मुक्त होते हैं, बल्कि ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, सफाई व्यवस्था और दृश्य रूप से स्वच्छ वातावरण भी सुनिश्चित करते हैं।
तीन साल में 467% की उल्लेखनीय वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2022 में ODF Plus गाँवों की संख्या करीब 1 लाख थी, जो 19 नवंबर 2025 तक बढ़कर 5.67 लाख हो गई। यानी तीन वर्षों में 467% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इनमें से 4.85 लाख से अधिक गाँव ODF Plus मॉडल श्रेणी में आते हैं, जहाँ ठोस-तरल कचरा प्रबंधन और समग्र सफाई व्यवस्था बेहतर स्तर पर लागू है।
शहरों में भी तेज़ी से बढ़ रहा स्वच्छता का स्तर
स्वच्छता अभियान के तहत शहरी क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है—
- 4,692 शहर ODF घोषित,
- 4,314 शहर ODF+ स्तर पर,
- 1,973 शहर ODF++ श्रेणी में पहुँच चुके हैं।
शौचालय निर्माण लक्ष्यों से आगे
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत—
- व्यक्तिगत शौचालय निर्माण 108.62% के लक्ष्य से अधिक पूरा हुआ, कुल 63.74 लाख शौचालय बनाए गए।
- सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय निर्माण 125.46% तक पहुँचा, जिसके तहत 6.38 लाख से अधिक यूनिट तैयार की गईं।
जल जीवन मिशन और AMRUT से मिली अतिरिक्त गति
सरकार के अनुसार, ग्रामीण और शहरी स्वच्छता को मजबूत करने में जल जीवन मिशन और AMRUT योजनाएँ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
AMRUT के तहत—
- 34,447 करोड़ रुपये की लागत से 890 सीवरेज और सेप्टेज प्रोजेक्ट लागू किए गए,
- जिससे 4,622 MLD नई या बढ़ी हुई सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता तैयार हुई,
- जिसमें से 1,437 MLD क्षमता रीसायकल और रीयूज़ के लिए है।
इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने 68,000 करोड़ रुपये के 86 प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं, जिनसे 6,964 MLD नई STP क्षमता विकसित होगी।
“संरचना निर्माण से आगे बढ़कर सम्मान और जीवन गुणवत्ता पर जोर”
सरकार ने कहा कि स्वच्छता अब केवल संरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, समावेशन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का माध्यम बन चुकी है। इससे न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, बल्कि देश के ग्रामीण और शहरी जीवन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।






