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आर्थिक मोर्चे पर आत्मविश्वास से आगे बढ़ता भारत

दुनिया की अर्थव्यवस्था जब अनिश्चितताओं, राजनीतिक तनावों और सुस्त मांग के दौर से गुजर रही है, तब भारत की आर्थिक तस्वीर निश्चित रूप से उत्साह से भर देती है। मजबूत घरेलू मांग, निवेश के प्रति सकारात्मक माहौल, बढ़ता औद्योगिक भरोसा और निरंतर सुधारों की प्रक्रिया ने भारत को आर्थिक मोर्चे पर एक आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) का ताजा बिजनेस आउटलुक सर्वे इसी सशक्त और आशाजनक परिदृश्य की पुष्टि करता है।

दरअसल, भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल और गतिशील घरेलू बाजार है। वैश्विक स्तर पर जहां निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाएं दबाव महसूस कर रही हैं, वहीं भारत में आंतरिक मांग विकास का मजबूत आधार बनी हुई है। यही कारण है कि उद्योग जगत का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी नजर आ रही हैं।

इसी का परिणाम है कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में CII का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़कर 66.5 तक पहुंच गया है, जो पिछले पांच तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। किसी भी सूचकांक में 50 से ऊपर का आंकड़ा सकारात्मकता को दर्शाता है, ऐसे में 66.5 यह स्पष्ट करता है कि भारतीय उद्योग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है

सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में लगभग दो-तिहाई कंपनियों ने मजबूत मांग दर्ज की, जबकि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 72 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि आने वाले समय में मांग और बढ़ेगी। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बढ़ता निवेश इस बात का प्रमाण है कि अर्थव्यवस्था में भरोसे का माहौल बना हुआ है।

CII सर्वे यह भी दर्शाता है कि कंपनियां अपनी हायरिंग और निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि जहां दुनिया के कई देशों में ऊंची ब्याज दरों, महंगाई और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर और मजबूत बनी हुई है। इसके पीछे मजबूत घरेलू सुधार, नीतिगत स्थिरता और सरकार-उद्योग के बीच निरंतर संवाद की अहम भूमिका है।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बताया है। IMF की कम्युनिकेशन डायरेक्टर जूली कोज़ैक के अनुसार, भारत की तीसरी तिमाही की आर्थिक वृद्धि उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत रही है।

IMF की आर्टिकल IV स्टाफ रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ 6.6 प्रतिशत रह सकती है। इस वृद्धि का सबसे बड़ा कारण मजबूत घरेलू खपत को बताया गया है। यानी भारत में लोग खर्च कर रहे हैं, बाजार सक्रिय हैं और उद्योग पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को निरंतर गति मिल रही है।

आईएमएफ अगले सप्ताह अपना विश्व आर्थिक आउटलुक (WEO) अपडेट जारी करने वाला है, जिसमें भारत समेत प्रमुख देशों की आर्थिक स्थिति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की ताजा तस्वीर सामने आएगी। इससे यह और स्पष्ट होगा कि हालिया आर्थिक आंकड़ों ने भारत और दुनिया की अर्थव्यवस्था को किस तरह प्रभावित किया है।

निष्कर्षतः, CII का बिजनेस आउटलुक सर्वे और IMF के आकलन यह साफ संदेश देते हैं कि भारत का घरेलू आर्थिक मोर्चा मजबूत, संतुलित और आत्मविश्वास से भरा हुआ है। मजबूत मांग, बढ़ता निवेश, सुधारों की निरंतरता और नवाचार पर फोकस भारत को उज्ज्वल आर्थिक भविष्य की ओर ले जा रहा है। यदि सरकार और उद्योग इसी समन्वय के साथ आगे बढ़ते रहे, तो आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगा और समावेशी व टिकाऊ विकास का वैश्विक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

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