⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता आयोग को प्रदूषण स्रोतों की पहचान के लिए 2 सप्ताह का समय दिया

सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर ठोस और दीर्घकालिक समाधान सुझाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि समाधान ऐसे होने चाहिए जिन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके, ताकि आम जनता, उद्योग और लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने आयोग को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर एक व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करे। अदालत ने कहा कि अब तक प्रदूषण नियंत्रण के कई उपाय इसलिए प्रभावी नहीं हो सके, क्योंकि विभिन्न विशेषज्ञों के परस्पर विरोधी सुझावों के चलते कोई स्पष्ट दिशा तय नहीं हो पाई।
🗓️ रिपोर्ट को लेकर अदालत की सख्ती
सुनवाई के दौरान अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने रिपोर्ट सौंपने के लिए दो महीने का समय मांगा, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अदालत ने साफ कहा कि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या पर अतिरिक्त देरी स्वीकार्य नहीं है।
इसके बाद न्यायालय ने आयोग को अंतिम रूप से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय देते हुए 21 जनवरी तक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
📄 स्थिति रिपोर्ट पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आयोग द्वारा पहले प्रस्तुत की गई स्थिति रिपोर्ट कई अहम मुद्दों पर मौन है, जिन पर न्यायालय पहले ही सवाल उठा चुका है। अदालत ने उम्मीद जताई कि आगामी रिपोर्ट में
प्रदूषण के वास्तविक स्रोत
अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान
और उनके प्रभावों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।
🌍 संतुलित समाधान पर जोर
न्यायालय ने यह भी दोहराया कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय संतुलित और व्यावहारिक होने चाहिए, ताकि
उद्योगों पर अनावश्यक दबाव न पड़े
रोजगार प्रभावित न हो
और आम नागरिकों को भी राहत मिल सके
यह आदेश खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर और अन्य प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।






