ममता बनर्जी के रेल मंत्री कार्यकाल की कैटरिंग नीति पर जांच, एनएचआरसी ने रेलवे बोर्ड को भेजा नोटिस

वर्ष 2010 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान लागू की गई रेलवे कैटरिंग नीति एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस नीति में कथित तौर पर आईआरसीटीसी की टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय को 9.5 प्रतिशत तक आरक्षण दिए जाने के आरोप सामने आए हैं।
⚖️ तुष्टिकरण की नीति का आरोप
इस मामले को लेकर ‘लीगल राइट्स ऑब्ज़र्वेटरी’ नामक एक कार्यकर्ता संगठन ने शिकायत दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि यह आरक्षण तुष्टिकरण की नीति के तहत किया गया, जो संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस फैसले के कारण अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अधिकारों में कटौती हुई, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
🧾 एनएचआरसी ने लिया संज्ञान
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि—
पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाए
तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
🚆 2009-10 के रेल बजट से जुड़ा मामला
दरअसल, वर्ष 2009-10 के रेल बजट भाषण में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में—
बेहतर गुणवत्ता का भोजन
स्वच्छ पेयजल
साफ शौचालय
बेहतर सफाई व्यवस्था
सुनिश्चित करने की घोषणा की थी। उन्होंने ‘जन आहार’ की उपलब्धता बढ़ाने और रेलवे कैटरिंग में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय व्यंजनों को शामिल करने पर भी जोर दिया था।
📜 21 जुलाई 2010 को लागू हुई थी नई नीति
इन्हीं घोषणाओं के आधार पर रेलवे बोर्ड ने 21 जुलाई 2010 को नई कैटरिंग नीति लागू की थी। रेलवे बोर्ड के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक (पर्यटन एवं कैटरिंग) मणि आनंद द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि—
नीति वित्त और विधि निदेशालय की सहमति से बनाई गई
इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा
सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को निर्देश भेजे गए
आईआरसीटीसी को आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया गया
🔍 एक दशक बाद फिर उठा विवाद
अब एक दशक से अधिक समय बाद, इस नीति में कथित आरक्षण प्रावधान को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एनएचआरसी की जांच के बाद इस मामले में आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।






