भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने पर पश्चिम बंगाल से हलफ़नामा मांगा: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार से पंद्रह दिनों के भीतर हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला एक जनहित याचिका के तहत उठाया गया था, जिसमें राज्य के उन खुले सीमाई इलाकों में कंटीले तार की बाड़ लगाने की मांग की गई है, जहाँ तस्करी और घुसपैठ की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। पश्चिम बंगाल की कुल लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है, जिसमें कई हिस्सों में अब भी प्रभावी बाड़ नहीं लग पाई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सीमा पर बाड़ की कमी के कारण सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। इन क्षेत्रों में अवैध पहुँच, तस्करी और मानव व्यापार जैसी गतिविधियाँ चिंता का विषय बनी रहती हैं। न्यायालय ने सीमा सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की भूमिका और अब तक उठाए गए कदमों पर स्पष्ट जवाब देने को कहा है। अदालत की खंडपीठ ने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं कि राज्य इस मुद्दे को गंभीरता से ले।
केंद्र सरकार के अतिरिक्त महान्यायवादी अशोक चक्रवर्ती ने न्यायालय को अवगत कराया कि पश्चिम बंगाल सरकार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में केंद्र के साथ पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि सीमा पर बाड़ लगाने के लिए आवश्यक भूमि को अधिग्रहित करने में देरी के कारण परियोजना प्रभावित हो रही है। केंद्र का कहना है कि बार-बार आग्रह के बावजूद राज्य की ओर से अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस पर असंतोष जताते हुए राज्य सरकार से विस्तृत हलफ़नामा प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, सुरक्षा इंतजामों और केंद्र के साथ समन्वय को लेकर अब तक की प्रगति का पूरा विवरण देना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा राष्ट्रीय महत्व का विषय है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
अगली सुनवाई में राज्य द्वारा प्रस्तुत हलफ़नामे के आधार पर न्यायालय आगे की कार्रवाई तय करेगा। इस बीच, सीमा सुरक्षा और बाड़ लगाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है।






