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भारत ने JCM को बताया वैश्विक जलवायु कार्रवाई का महत्वपूर्ण माध्यम, COP-30 में भूपेन्द्र यादव ने रखे विचार

बेलेम (ब्राजील)।
भारत ने संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज़्म (JCM) को वैश्विक स्तर पर न्यायसंगत, तकनीक-आधारित और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले महत्वपूर्ण जलवायु समाधान के रूप में रेखांकित किया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने यह टिप्पणी ब्राजील के बेलेम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-30) के दौरान जापान के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आयोजित 11वीं JCM भागीदार देशों की बैठक में की। बैठक की अध्यक्षता जापान के पर्यावरण मंत्री हीरोताका इसिहारा ने की।

JCM साझेदार देशों की संख्या बढ़कर 31

बैठक के दौरान इसिहारा ने बताया कि JCM साझेदार देशों की संख्या अब 31 हो गई है और 280 से अधिक परियोजनाएँ पेरिस समझौते के अनुच्छेद-6 के तहत चल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सहयोग लंबी अवधि वाले निवेश, क्षमता निर्माण और जलवायु लचीलापन परियोजनाओं में भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा।

“दुनिया जब न्यायपूर्ण और तकनीक-आधारित समाधान खोज रही है, तब JCM अत्यंत महत्वपूर्ण”

भूपेन्द्र यादव ने कहा कि वैश्विक समुदाय जहां बड़े पैमाने पर लागू होने वाले, न्यायसंगत और तकनीक-आधारित जलवायु समाधान तलाश रहा है, वहीं JCM जैसा सहयोगी तंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने इसे भारत–जापान की मजबूत साझेदारी और सतत विकास के प्रति साझा संकल्प का प्रतीक बताया।

उन्होंने भारत और जापान के बीच 7 अगस्त को हुए समझौता पत्र (MoC) का उल्लेख करते हुए कहा कि JCM अनुच्छेद-6 के अनुरूप कार्य करता है और सरकारों व निजी क्षेत्र को संयुक्त रूप से—

  • उत्सर्जन कटौती परियोजनाएँ विकसित करने,
  • वित्त जुटाने,
  • उन्नत तकनीक लगाने,
  • और पारदर्शी ढंग से उत्सर्जन में कटौती साझा करने
    का सक्षम ढांचा उपलब्ध कराता है।

JCM से भारत की जलवायु रणनीतियों को मिलेगा सीधा लाभ

मंत्री यादव ने बताया कि JCM से भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और दीर्घकालिक निम्न उत्सर्जन विकास रणनीति को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्वीकृत कम-कार्बन तकनीकें भारत के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को प्रोत्साहित करेंगी और उन्नत तकनीकों के स्थानीयकरण में मदद देंगी।

उन्होंने कहा कि भारत में JCM के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

  • अनुच्छेद-6 के लिए राष्ट्रीय नामित एजेंसी द्वारा नियम व गतिविधि चक्र दस्तावेज अंतिम चरण में हैं।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो भारतीय कार्बन बाज़ार पोर्टल विकसित कर रहा है, जिसमें JCM व अन्य सहयोगी तंत्रों के लिए अलग खंड होगा, जो पारदर्शिता और परियोजना सुविधा सुनिश्चित करेगा।

भारत का मानना है कि JCM जैसे तंत्र जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।

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