काजीरंगा से एमपी पहुंचे जंगली भैंसे: सीएम मोहन यादव ने कान्हा में किया पुनर्स्थापन का शुभारंभ

मध्य प्रदेश में एक सदी बाद जंगली भैंसों (वाइल्ड बफेलो) की वापसी की ऐतिहासिक पहल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को बालाघाट जिले के सूपखार क्षेत्र में इन भैंसों को प्राकृतिक आवास में छोड़कर पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ किया।
ये जंगली भैंसे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए हैं और इन्हें कान्हा टाइगर रिजर्व में बसाया जा रहा है। पहले चरण में तीन मादा और एक नर भैंसे को छोड़ा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसके तहत कुल 50 जंगली भैंसों को चरणबद्ध तरीके से मध्य प्रदेश लाने का लक्ष्य है। इस सीजन में आठ भैंसों को स्थानांतरित किया जाएगा।
यह पहल केवल एक प्रजाति के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के वन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम मानी जा रही है। इस परियोजना से मध्य प्रदेश और असम के बीच वन्यजीव आदान-प्रदान का नया अध्याय भी जुड़ रहा है।
इसके तहत असम से गैंडे के दो जोड़े मध्य प्रदेश लाए जाएंगे, जिन्हें वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा। इसके बदले में मध्य प्रदेश से असम को तीन बाघ और छह मगरमच्छ भेजे जाएंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान के अध्ययन में कान्हा को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है। यहां के विस्तृत घास के मैदान, पर्याप्त जल स्रोत और कम मानव हस्तक्षेप इस प्रजाति के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी करीब 100 साल पहले समाप्त हो गई थी। आखिरी बार 1979 के आसपास कान्हा के सूपखार क्षेत्र में इन्हें देखा गया था। अत्यधिक शिकार, आवास का क्षरण और मानव हस्तक्षेप इसके प्रमुख कारण रहे।
चीता पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से राज्य की जैव विविधता को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, और यह पहल उस गौरव को और मजबूत करेगी।






