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राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अमेरिका लगा सकता है नया टैरिफ, भारत के निर्यात पर पड़ सकता है असर

अमेरिका एक बार फिर US National Security Tariff के जरिए वैश्विक व्यापार पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। हालिया घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन 1962 के ट्रेड कानून के प्रावधान Section 232 Tariff के तहत कुछ नए उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाने की तैयारी में है।

इन संभावित टैरिफ की जद में बड़ी बैटरियां, कास्ट आयरन, प्लास्टिक पाइप, इंडस्ट्रियल केमिकल, पावर ग्रिड और टेलीकॉम उपकरण जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर भारत जैसे निर्यात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है।

सेक्शन 232 क्या है?

1962 के अमेरिकी ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट का सेक्शन 232 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगा सकें। इस प्रावधान का उपयोग पहले स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर, कार और ऑटो पार्ट्स पर शुल्क लगाने के लिए किया जा चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये प्रस्तावित टैरिफ उस 15% ग्लोबल टैरिफ से अलग होंगे, जिसे पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने पांच महीने तक लागू रखने का प्रस्ताव दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई रणनीति

हाल ही में Supreme Court of the United States ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए अधिकांश टैरिफ को 6-3 के फैसले से खत्म कर दिया। हालांकि, इस निर्णय में सेक्शन 232 के तहत लगाए गए टैरिफ पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

यही वजह है कि प्रशासन अब Section 232 Tariff को एक वैकल्पिक और कानूनी रूप से मजबूत रास्ते के रूप में देख रहा है।

भारत पर संभावित असर

अगर नए US National Security Tariff लागू होते हैं, तो भारत के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। खासकर निम्न क्षेत्रों में असर देखने को मिल सकता है:

  • Metal Export from India (स्टील, एल्युमिनियम, कास्ट आयरन)

  • Chemical Export India (औद्योगिक केमिकल)

  • औद्योगिक पुर्जे और इंजीनियरिंग उत्पाद

  • पावर और टेलीकॉम उपकरण

भारत वैश्विक सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ से निर्यात लागत बढ़ सकती है और प्रतिस्पर्धात्मकता घट सकती है।

आगे क्या?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नई जांच कब शुरू होगी और टैरिफ कब लागू होंगे। सेक्शन 232 के तहत लंबी जांच प्रक्रिया जरूरी होती है, लेकिन एक बार टैरिफ लागू हो जाने के बाद राष्ट्रपति को उन्हें एकतरफा संशोधित करने का अधिकार होता है।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की नेशनल और इकोनॉमिक सिक्योरिटी प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी कानूनी अधिकारों का उपयोग किया जाएगा।

वैश्विक व्यापार जगत अब यह देखने के इंतजार में है कि क्या यह कदम एक नए Global Trade War की शुरुआत साबित होगा या सिर्फ रणनीतिक दबाव की नीति का हिस्सा रहेगा।

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