ईरान पर हवाई हमलों की संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने की निंदा, तुरंत वार्ता शुरू करने की अपील

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने ईरान पर अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र और पूरी दुनिया को बड़े युद्ध से बचाने के लिए तुरंत बातचीत शुरू करने का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक को संबोधित करते हुए गुतेरस ने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तनाव को तुरंत कम नहीं किया गया, तो यह व्यापक संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसके गंभीर मानवीय और क्षेत्रीय परिणाम हो सकते हैं।
महासचिव ने ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमलों की भी निंदा की और कहा कि इससे बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता प्रभावित हुई है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की।
सुरक्षा परिषद में अलग-अलग पक्षों की दलीलें
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को वैध ठहराते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उनके अनुसार यह राजनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा है।
वहीं, इज़रायल के संयुक्त राष्ट्र राजदूत डैनी डैनन ने भी हमलों का बचाव किया और कहा कि इज़रायल के अस्तित्व की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी था। उन्होंने कहा कि उनका देश चरमपंथ को फैलने से पहले रोकने की नीति पर काम कर रहा है और किसी भी कट्टरपंथी शासन को परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए खतरा बनने नहीं देगा।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने दावा किया कि हवाई हमलों में सैकड़ों ईरानी नागरिक मारे गए और घायल हुए हैं। उन्होंने इसे युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करार देते हुए सुरक्षा परिषद से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
बढ़ते तनाव पर वैश्विक चिंता
मध्य-पूर्व में तेजी से बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में बातचीत के जरिए तनाव कम किया जा सकेगा या स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाएगी।





