तमिलनाडु चुनाव 2026: कांचीपुरम सीट पर नए समीकरण, मुकाबला हुआ दिलचस्प

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में कांचीपुरम सीट इस बार सबसे चर्चित सीटों में शामिल होती जा रही है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के साथ-साथ यहां के बदलते राजनीतिक समीकरण इसे बेहद दिलचस्प बना रहे हैं। पारंपरिक दलों के अलावा नई राजनीतिक ताकतों की एंट्री ने मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है।
📜 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान
वेगवती नदी के किनारे बसा कांचीपुरम प्राचीन काल में पल्लव और चोल राजवंशों की राजधानी रहा है। यहां के कामाक्षी अम्मन मंदिर, एकाम्बरेश्वर मंदिर और वरदराज पेरुमल मंदिर देशभर में प्रसिद्ध हैं।
साथ ही कांचीपुरम अपनी रेशमी साड़ियों के लिए भी जाना जाता है, जिन्हें जीआई टैग प्राप्त है।
🗳️ चुनावी इतिहास
2021 के विधानसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार एझिलरासन ने जीत दर्ज की थी।
दूसरे स्थान पर पट्टाली मक्कल काची के महेश कुमार रहे।
1977 के बाद से इस सीट पर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने 6 बार और DMK ने 4 बार जीत हासिल की है, जिससे यह सीट लंबे समय तक AIADMK के प्रभाव में रही, हालांकि हाल के वर्षों में DMK ने अपनी पकड़ मजबूत की है।
⚠️ प्रमुख स्थानीय मुद्दे
- गर्मियों में पेयजल संकट
- जल निकासी और सीवरेज की समस्या
- तेजी से शहरीकरण के बावजूद अधूरी सुविधाएं
- बुनकरों को पर्याप्त सहायता का अभाव
🧭 राजनीतिक समीकरण
🔴 DMK की स्थिति
सत्तारूढ़ DMK सरकार अपनी योजनाओं और विकास कार्यों के आधार पर समर्थन बनाए रखने की कोशिश में है, लेकिन स्थानीय मुद्दे चुनौती बने हुए हैं।
🔵 AIADMK की रणनीति
AIADMK सरकार के खिलाफ असंतोष को मुद्दा बना रही है, लेकिन आंतरिक एकजुटता इसकी बड़ी चुनौती है।
🟠 BJP की भूमिका
भारतीय जनता पार्टी धीरे-धीरे शहरी मतदाताओं और युवाओं में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
⭐ नई एंट्री – TVK
अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम इस चुनाव में नया फैक्टर बनकर उभरी है। यह पार्टी खासतौर पर युवा वोटर्स को प्रभावित कर सकती है, जिससे वोटों का विभाजन संभव है।






