सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR प्रक्रिया को बताया वैध, कहा- चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण का अधिकार

Supreme Court of India ने बिहार चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अगुआई वाली पीठ ने कहा कि Election Commission of India को विशेष परिस्थितियों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए अलग प्रक्रिया अपनाने का संवैधानिक अधिकार है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और निष्पक्ष तथा शुद्ध मतदाता सूची सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है। कोर्ट के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में SIR जैसी प्रक्रिया अपनाना संविधान या कानून के खिलाफ नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम चार सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को भेजे जाएं, ताकि आगे की आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सके।
बिहार में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसके खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह प्रक्रिया सामान्य संशोधन से अलग है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और चुनाव आयोग की कार्रवाई को वैध माना।
सुप्रीम कोर्ट की 3 अहम टिप्पणियां:
- चुनाव आयोग को संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराने का अधिकार प्राप्त है।
- SIR का उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है, जो संविधान के मूल सिद्धांतों से जुड़ा है।
- अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया का लक्ष्य निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को मजबूत करना है और यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है।






