रीवा में दुनिया का इकलौता महामृत्युंजय मंदिर: शिवलिंग में हैं 1001 छिद्र: खुदाई के दौरान निकला था अद्भुत स्वरूप

आशुतोष तिवारी,रीवा। सावन के पहले सोमवार पर रीवा पूरी तरह से शिवमय है। ब्रह्ममुहूर्त से शहर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है। भगवान शिव का जलाभिषेक किया जा रहा है। मंदिरों में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष हो रहे हैं।
भगवान महामृत्युंजय दुनिया का इकलौता मंदिर मध्यप्रदेश के रीवा जिले में है। यहां भक्तों ने गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प से शिवलिंग का जलाभिषेक किया। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों में उत्साह है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाएं की गई हैं।
महामृत्युजंय मंत्र से टलती है अकाल मृत्यु
महामृत्युजंय मंत्र के जाप से अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है। अल्प आयु दीर्घ आयु में बदल जाती है। मंत्र के जाप से सुख-सम्पत्ति और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

1001 छिद्र वाला इकलौता शिवलिंग
रीवा रियासत के महाराजा पुष्पराज सिंह ने बताया कि यह मंदिर मध्यप्रदेश के रीवा राजघराने के किला परिसर में मौजूद दुनिया का इकलौता महामृत्युंजय मंदिर हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि अन्य शिवलिंग की बनावट से बिल्कुल अलग है। इस शिवलिंग में 1001 छिद्र है। विश्व के और किसी भी मंदिर में ऐसा शिवलिंग नहीं है। मंदिर में भगवान शिव के रूप में महामृत्युंजय भगवान की अलौकिक शक्ति वाले सफेद शिवलिंग है।

शक्ति के आगे यमराज भी हारे
महामृत्युजंय मंदिर के निर्माण और मूर्ति स्थापना का कोई लिखित इतिहास नही है। पुराणों के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र का शिव पुराण मे उल्लेख मिलता है। देवाधिदेव महादेव ने महासंजीवनी महामृत्युजंय मंत्र की उत्पत्ति की थी। इस मंत्र का गुप्त रहस्य केवल माता पार्वती को बताया था। महामृत्युजंय शिवलिंग के दर्शन और मंत्र जाप से कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस मंदिर की शक्ति के आगे यमराज भी हार मान लेते है।

असाध्य रोगों से मिलता है छुटकारा
आचार्य बंशमणि तिवारी मुख्य पुजारी ने बताया कि महामृत्युजंय भगवान के रूद्राभिषेक, रूद्रयज्ञ, भजन पूजन से राजभय विद्रोह महामारी रोग व्याधि और असाध्य रोगो सें छुटकारा मिलता है।
इसके कई उदाहरण देखने को मिलते है। भगवान महामृत्युजंय के जाप से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु दूर-दूर से महामृत्युंजय भगवान के दर्शन के लिए दौड़े चले आते है। महामृत्युजंय शिवलिंग भी 12 ज्योर्तिलिंगों के समान है। महामृत्युजंय मंत्र पढ़ने-सुनने से अकाल मृत्यु टल जाती है। मृत्युभय खत्म हो जाता है।
दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
मंदिर में प्रतिदिन महामृत्युंजय जाप होता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर रोग, भय और संकटों से मुक्ति मिलती है। इसी कारण रीवा ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
इतिहास और आस्था का अनोखा संगम
महामृत्युंजय मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि रीवा की ऐतिहासिक विरासत भी है। बघेल राजवंश से जुड़ी यह कथा और शिवलिंग की अनोखी संरचना इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग पहचान देती है।