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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जारी किया ‘मिलिट्री विजन डॉक्यूमेंट’, 2047 तक आधुनिक और तकनीक-संपन्न सेना का रोडमैप

Rajnath Singh ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में भारतीय सशस्त्र बलों के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन डॉक्यूमेंट’ रोडमैप जारी किया। यह व्यापक ब्लूप्रिंट Headquarters Integrated Defence Staff द्वारा तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य रक्षा बलों को आधुनिक, इंटीग्रेटेड और तकनीक से लैस सैन्य शक्ति में बदलना है।

यह विजन डॉक्यूमेंट भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें भविष्य की युद्ध चुनौतियों का सामना करने के लिए इनोवेशन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और आधुनिक प्रशिक्षण ढांचे पर विशेष जोर दिया गया है।

सेना को मल्टी-डोमेन और इंटीग्रेटेड फोर्स बनाने पर जोर

विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में सामरिक सुधार, क्षमता विस्तार और संगठनात्मक बदलाव की जरूरत को रेखांकित किया गया है। इसके तहत सेना को इंटीग्रेटेड, मल्टी-डोमेन और फुर्तीली सैन्य शक्ति में बदलने की योजना बनाई गई है, जो दुश्मनों को प्रभावी तरीके से रोक सके और बदलते वैश्विक व क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल में देश के रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके।

इस दस्तावेज़ का एक प्रमुख उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, जिससे योजना निर्माण, ऑपरेशनल रणनीति और क्षमता विकास में अधिक तालमेल सुनिश्चित हो सके।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस

Ministry of Defence India के अनुसार विजन डॉक्यूमेंट में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (स्वदेशी तकनीक और समाधान) को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण और तकनीकी क्षमता मजबूत होने के साथ ऑपरेशनल तैयारी भी बेहतर होगी।

इस रोडमैप में शॉर्ट-टर्म, मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों के साथ एक स्पष्ट रणनीति तय की गई है, जो विश्व स्तरीय सैन्य क्षमताओं के विकास, संस्थागत सुधार और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने में मदद करेगी।

भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सैन्य, कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक ताकत का समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि निरंतर सुधार, नवाचार और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के जरिए भारत की सेना को आजादी की 100वीं वर्षगांठ (2047) तक दुनिया की सबसे सम्मानित और तकनीकी रूप से उन्नत सेनाओं में शामिल करने का लक्ष्य है।

इस अवसर पर Anil Chauhan, Dinesh K Tripathi, A. P. Singh, रक्षा सचिव Rajesh Kumar Singh और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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