केंद्रीय मंत्री ललन सिंह 25 मई को मिजोरम में ₹32.15 करोड़ की मत्स्य परियोजनाओं का करेंगे शुभारंभ
केंद्रीय मत्स्य पालन एवं पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह 25 मई को मिजोरम में ₹32.15 करोड़ की महत्वपूर्ण मत्स्य पालन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में आधुनिक, टिकाऊ और आत्मनिर्भर मत्स्य पालन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्रालय के अनुसार, आइजोल में “क्षेत्रीय समीक्षा बैठक : पूर्वोत्तर क्षेत्र-2026” का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत कई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे।
मंत्रालय ने बताया कि यह पहल पूर्वोत्तर राज्यों में मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने, स्थानीय रोजगार बढ़ाने और आजीविका के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री लाभार्थियों को मत्स्य पालन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) वितरित करेंगे तथा सर्वश्रेष्ठ मत्स्य पालन स्टार्टअप और उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
कई राज्यों के मंत्री और अधिकारी होंगे शामिल
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के मत्स्य पालन एवं पशुपालन विभागों के मंत्री, सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
बैठक में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ किसानों के कल्याण, ग्रामीण आजीविका और सतत विकास को लेकर भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
इन पहलों का भी होगा शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समितियों (MDCS) के विस्तार के लिए ग्राम स्तरीय सर्वेक्षण की शुरुआत, अफ्रीकी स्वाइन फीवर जागरूकता फिल्म का विमोचन, “सूअर पालन में अच्छी पशुपालन पद्धतियाँ” पुस्तिका का लोकार्पण और ‘मुलको’ गाय के घी की लॉन्चिंग की जाएगी।
इसके अलावा “मिजो कैफे”, एफपीओ कार्यालय-सह-बिक्री आउटलेट का उद्घाटन और कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी।
केंद्र सरकार का मानना है कि इन पहलों से पूर्वोत्तर क्षेत्र की मत्स्य और पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी तथा किसानों, उद्यमियों और सहकारी समितियों को दीर्घकालिक लाभ होगा।






