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सिविल सेवा दिवस पर पीएम मोदी का संदेश: ‘विकसित भारत’ की नींव है जनसेवा और सुशासन

नई दिल्ली में आयोजित सिविल सेवा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सिविल सेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा और सुशासन ही ‘विकसित भारत’ की मजबूत नींव हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाना ही एक सशक्त और संवेदनशील भारत के निर्माण का मूल उद्देश्य है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए सिविल सेवकों को उनके कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों की याद दिलाई। उन्होंने लिखा:
“शीलं परहितासक्तिः अनुत्सेकः क्षमा धृतिः। अलोभश्चेति विद्यायाः परिपाकोञ्चलं फलम्॥”
इसका अर्थ है कि सच्ची विद्या का परिपक्व फल अच्छे चरित्र, परोपकार की भावना, अहंकार रहित व्यवहार, क्षमा, धैर्य और लोभ से दूर रहने में निहित होता है।

पीएम मोदी ने कहा कि यही गुण एक आदर्श सिविल सेवक की पहचान हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने सभी सिविल सेवकों से आह्वान किया कि वे जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए हर नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचाने के अपने संकल्प को और मजबूत करें।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सिविल सेवा दिवस सुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने जमीनी स्तर से लेकर नीति-निर्माण तक सिविल सेवकों के योगदान की सराहना की और कहा कि उनके प्रयास देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत के सिविल सेवक कर्तव्यनिष्ठा, करुणा, उत्कृष्टता और नवाचार के साथ सेवा करते हुए देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

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