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भ्रष्टाचार का बादशाह: धर्मेंद्र भदौरिया के ठिकानों पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा

75 लाख नकद, ढाई किलो सोना बरामद; अवैध शराब सिंडिकेट और 500 करोड़ की संपत्ति की जांच शुरू

प्रदेश प्रकाश विशेष रिपोर्ट | इंदौर

लोकायुक्त की टीम ने बुधवार तड़के रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर सनसनी मचा दी।
ओल्ड पलासिया के फ्लैट, बिजनेस पार्क ऑफिस और एरोड्रम रोड स्थित उनके कार्यालय समेत कई स्थानों पर कार्रवाई की गई। वहीं ग्वालियर में इंद्रमणि नगर स्थित उनके निवास पर भी टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया।

छापे में अब तक 75 लाख रुपए नकद, ढाई किलो सोना, ढाई किलो चांदी, महंगी घड़ियाँ और विदेशी मुद्रा बरामद की गई है।
लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान के अनुसार भदौरिया की सेवा अवधि के दौरान कुल वैध आय करीब 2 करोड़ थी, जबकि खर्च और संपत्ति करीब 8 करोड़ रुपए से अधिक की पाई गई है।

भदौरिया का शराब सिंडिकेट: “धार डिस्टिलरी से चलता था खेल”

जांच में सामने आया है कि धर्मेंद्र भदौरिया ने आबकारी विभाग में रहते हुए अवैध शराब के कारोबार से करोड़ों रुपए कमाए।
सूत्रों के मुताबिक, धार स्थित डिस्टिलरी से अवैध शराब के परिवहन में भदौरिया की मुख्य भूमिका थी।
अगस्त 2025 में रिटायर होने के बाद भी उन्होंने अलीराजपुर में किराए का मकान लेकर वहीं से अपनी अवैध गतिविधियाँ जारी रखीं।

ED की एंट्री तय? 500 करोड़ की संपत्ति का शक

लोकायुक्त को अब तक 8 बैंक अकाउंट और 3 लॉकर का पता चला है।
इनके बेटे सूर्यांश भदौरिया द्वारा फिल्म प्रोजेक्ट्स में किए गए निवेश की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

सूत्रों की मानें तो अगर ED (प्रवर्तन निदेशालय) इस मामले में जांच शुरू करती है, तो यह काला धन का मामला 500 करोड़ रुपए से भी ऊपर जा सकता है।

“आबकारी अफसर से अरबपति तक” — सवालों के घेरे में सिस्टम

भदौरिया 1987 में आबकारी विभाग में भर्ती हुए थे।
2020 में शराब ठेकों की नीलामी में लापरवाही के चलते उन्हें निलंबित भी किया गया था।
लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी धन का मोह कम नहीं हुआ उन्होंने अलीराजपुर से नेटवर्क चलाकर अपने रसूख से काले कारोबार को जिंदा रखा।

लोकायुक्त की टीम ने संकेत दिए हैं कि अब भदौरिया के सहयोगियों और ट्रांसफर चैनल की भी जांच होगी यानी मामला और गहराएगा।

जनता पूछ रही है – “75 लाख या 500 करोड़?”

क्या यह सिर्फ एक अधिकारी का भ्रष्टाचार है,
या फिर एक सिस्टम में पनपे उस रैकेट का चेहरा है जो सालों से कानून को ठेंगा दिखा रहा है?

 

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