नेपाल में चैत्र पूर्णिमा पर तामांग समुदाय ने मनाया ‘तेमाल जात्रा’, दिखी आस्था और परंपरा

Chaitra Purnima के अवसर पर नेपाल के Kathmandu के बौद्ध क्षेत्र में तामांग समुदाय ने ऐतिहासिक ‘तेमाल जात्रा’ श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाई। यह पर्व समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

हर वर्ष चैत्र पूर्णिमा के दिन Boudhanath Stupa, Swayambhunath Temple और Namo Buddha जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर इस जात्रा का आयोजन किया जाता है।

परंपरा के अनुसार, इस जात्रा की शुरुआत तेमाल क्षेत्र से मानी जाती है। श्रद्धालु दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए दीप जलाते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

इस दौरान श्रद्धालु बौद्ध स्तूप परिसर में ‘छ्योमि’ (दीप) जलाते हैं और मृतकों के नाम पर ‘ङो’ पूजा करते हैं। लामा गुरुओं के नेतृत्व में ‘ङोवा मोन्लम’ जैसे विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न किए जाते हैं।

मान्यता है कि इन अनुष्ठानों से मृत आत्माओं को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जात्रा की परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु पहले बौद्ध में पूजा करते हैं, फिर Balaju Baise Dhara में स्नान कर Swayambhunath Temple पहुंचकर दीप जलाते हैं और अस्थि विसर्जन करते हैं।

इस आयोजन में मकवानपुर, ललितपुर, नुवाकोट, सिन्धुपाल्चोक और काभ्रेपलान्चोक सहित नेपाल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में तामांग समुदाय के लोग भाग लेते हैं।

यह जात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि नेपाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी दर्शाती है।

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