नेपाल पीएम के सीमा विवाद वाले बयान पर अपनी ही पार्टी में मतभेद, आरएसपी पर बढ़ा दबाव
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा संसद में दिए गए सीमा विवाद संबंधी बयान को लेकर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर मतभेद सामने आने लगे हैं। प्रधानमंत्री के उस बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है।
पार्टी के भीतर दो गुट
सूत्रों के अनुसार आरएसपी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री को अपना बयान वापस लेकर संसद के माध्यम से राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए। वहीं पार्टी के भीतर एक दूसरा समूह प्रधानमंत्री के समर्थन में खड़ा है और किसी भी प्रकार की माफी या बयान वापसी के पक्ष में नहीं है।
विपक्ष ने की माफी की मांग
प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विपक्ष का कहना है कि यह टिप्पणी राष्ट्रीय हित और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बयान को संसदीय रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है।
रवि लामिछाने ने दिया संयम बरतने का निर्देश
Rabi Lamichhane ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया है कि जब तक पार्टी की आधिकारिक राय तय नहीं हो जाती, तब तक कोई भी नेता इस मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी न करे।
हालांकि इसके बावजूद कुछ सांसदों और नेताओं ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के बयान को लेकर असहमति जताई है। इससे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
सीमा विवाद पर सावधानी बरतने की सलाह
आरएसपी सांसद एवं अधिवक्ता यज्ञमणि न्यौपाने ने कहा कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री की मंशा को गलत तरीके से समझा गया हो सकता है और पूरे संदर्भ को ध्यान में रखकर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
वर्चुअल बैठक में भी उठा मुद्दा
सोमवार को पार्टी सचिवालय की वर्चुअल बैठक में भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में कई नेताओं ने कहा कि सीमा विवाद जैसे विषयों का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से किया जाना चाहिए और ऐसे मुद्दों को राजनीतिक विवाद का रूप देने से बचना चाहिए।
बैठक में यह भी चिंता जताई गई कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद पार्टी नेताओं को मीडिया और जनता के सवालों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए स्पष्ट आधिकारिक रुख आवश्यक है।
प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व के बीच चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने के बीच टेलीफोन पर बातचीत भी हुई। इस दौरान लामिछाने ने कथित रूप से प्रधानमंत्री को बताया कि उनके बयान से राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर जटिलताएं पैदा हुई हैं, जिन्हें गंभीरता से संबोधित किए जाने की आवश्यकता है।
अगली संसद बैठक पर टिकी निगाहें
नेपाल की राजनीति में यह मुद्दा लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बढ़ते दबाव के बीच अब सभी की निगाहें संसद की अगली बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह इस मामले पर स्पष्टीकरण दे सकते हैं या फिर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जा सकता है।
सीमा विवाद से जुड़ा यह मामला अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नेपाल की आंतरिक राजनीति और कूटनीतिक संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण विषय बन गया है।






