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मध्य प्रदेश ने गेहूं खरीदी में बनाया नया रिकॉर्ड, किसानों से 1.4 करोड़ मीट्रिक टन उपार्जन

मध्य प्रदेश ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन में नया इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड खरीद का आंकड़ा हासिल किया है। राज्य में किसानों से अब तक 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, जो प्रदेश के लिए अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। राज्य सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल के साथ 40 रुपये बोनस देकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान सुनिश्चित किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से वीडियो संदेश के जरिए जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए पंजीकृत किसानों से रिकॉर्ड स्तर पर खरीदी की गई है। उन्होंने कहा कि अब तक किसानों को 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

देश में गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश की मजबूत स्थिति

मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं खरीदने वाले किसानों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन गया है। वहीं गेहूं उत्पादन के क्षेत्र में पंजाब के बाद मध्य प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे लंबे समय तक गेहूं खरीदी प्रक्रिया संचालित करने वाला राज्य भी मध्य प्रदेश ही है।

छोटे किसानों को पहले मिला मौका

सरकार ने इस बार खरीदी प्रक्रिया में नई व्यवस्था लागू करते हुए छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों से पहले गेहूं खरीदा। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह व्यवस्था पहली बार लागू की गई, जिससे छोटे किसानों को प्राथमिकता मिल सकी। अब तक छोटे किसानों से करीब 32.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है।

प्रदेश में अब तक लगभग 13.75 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसानों की उपज गोदामों तक पहुंच चुकी है।

किसानों के हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस पूरे वर्ष को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में समर्पित किया है, ताकि किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जा सके।

सरकार का दावा है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को लाभकारी बनाने के लिए आने वाले समय में भी कई नई योजनाएं लागू की जाएंगी।

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