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लोकसभा में विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन वापस, सर्वदलीय सहमति से लिया गया फैसला

लोकसभा ने मंगलवार को विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन वापस लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। यह फैसला केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर ध्वनिमत से सर्वसम्मति के साथ लिया गया।

गौरतलब है कि 3 फरवरी को सदन की कार्यवाही में बाधा और हंगामे के आरोप में 8 विपक्षी सांसदों को बजट सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित किया गया था। इनमें गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरींदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिकम टैगोर, डॉ. प्रशांत यदोराव पाडोले, चामला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन शामिल थे।

सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

निलंबन वापस लेने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनी कि सदन की कार्यवाही को सुचारू और मर्यादित तरीके से चलाया जाएगा।

नियमों के पालन पर जोर

प्रस्ताव पेश करते हुए किरण रिजिजू ने कहा कि सदन के प्रभावी संचालन के लिए नियमों और सीमाओं का पालन आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष सदन की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करता है, तो सरकार भी समान प्रतिबद्धता दिखाएगी।

बैठक में यह भी तय किया गया कि कोई भी सदस्य वेल में जाकर विरोध नहीं करेगा, कागज फाड़कर आसन की ओर नहीं फेंकेगा और अधिकारियों की मेज पर नहीं चढ़ेगा। सभी सांसदों को संसद की मर्यादा बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

संसद परिसर में सख्त दिशा-निर्देश जारी

इस बीच, लोकसभा सचिवालय ने एक बुलेटिन जारी कर सांसदों को संसद परिसर में अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। दिशा-निर्देश 124A(2) के तहत परिसर में हथियार, झंडे, पोस्टर, प्लैकार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री लाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

बुलेटिन में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में एआई-जनित आपत्तिजनक तस्वीरें और नारे प्रदर्शित किए गए थे, जो अनुचित हैं। सांसदों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे ऐसे किसी भी कृत्य से बचें।

लोकसभा अध्यक्ष की अपील

ओम बिरला ने सदन में सभी सदस्यों से अपील की कि वे संसद की गरिमा, पवित्रता और प्रतिष्ठा बनाए रखें। उन्होंने विशेष रूप से फर्जी या एआई-जनरेटेड तस्वीरों, पोस्टर और बैनर के उपयोग से बचने को कहा।

यह निर्णय संसद में सहयोग और संवाद की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही अधिक सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है।

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