लोकसभा ने 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच को दी मंजूरी

लोकसभा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच को मंजूरी दे दी है। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन कई बार स्थगित होने के बाद शुक्रवार को विनियोग विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इस विधेयक का उद्देश्य भारत की संचित निधि से अतिरिक्त राशि के भुगतान और विनियोग को अधिकृत करना है, ताकि चालू वित्त वर्ष की विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए आवश्यक व्यय किया जा सके।

2.81 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय को मंजूरी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच के तहत 2.81 लाख करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय के लिए संसद से मंजूरी मांगी थी।

इसमें 2.01 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध नकद राशि शामिल है, जबकि शेष राशि मंत्रालयों और विभागों की 80,145.71 करोड़ रुपये की बचत, बढ़ी हुई प्राप्तियों और रिकवरी से पूरी की जाएगी।

रक्षा सेवाओं के लिए बड़ा प्रावधान

सीतारमण ने सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि अनुपूरक मांगों में 41,430.48 करोड़ रुपये रक्षा सेवाओं के राजस्व व्यय के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक स्थिरीकरण कोष से भारत को वैश्विक स्तर पर आने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए वित्तीय मजबूती मिलेगी।

राजकोषीय घाटा रहेगा नियंत्रित

वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा संशोधित अनुमानों (RE) के दायरे में ही रहेगा

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने अनुदान की अनुपूरक मांगों को केवल दो चरणों तक सीमित रखा है

मनरेगा के लिए अतिरिक्त 30,000 करोड़ रुपये

सीतारमण ने बताया कि मनरेगा (MGNREGA) के लिए पहले 95,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसे 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा

इसके अलावा अनुपूरक मांगों के तहत अतिरिक्त 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।

किसानों के लिए उर्वरक सब्सिडी जारी

वित्त मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि किसानों के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और इस अनुपूरक मांग में पूरे किसान वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त प्रावधान किया गया है।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अप्रत्याशित आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए ‘फिस्कल बफर’ या इक्वलाइजेशन फंड बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।

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