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इंदौर का सफाई मॉडल देखने पहुंचें बंगाल के मंत्री दिलीप घोष: कंट्रोल सेंटर पर जानी प्रोसेसिंग; महापौर ने बताया इंदौर का स्वच्छता मॉडल

इंदौर। स्वच्छता के मामले में इंदौर की पहचान अब दूसरे राज्यों में भी बन गई है। पश्चिम बंगाल के कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष इंदौर पहुंचें। उन्होंने बंगाल से आए अधिकारियों की टीम ने इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था को करीब से समझा। उनकी टीम ने शहर की सफाई व्यवस्था को देखा और समझा कि इंदौर इतने सालों से सफाई में कैसे आगे बना हुआ है।

कचरा उठाने से लेकर प्रोसेसिंग तक देखा
बंगाल की टीम ने सबसे पहले कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की व्यवस्था देखी। इसके बाद घरों और दुकानों से कचरा उठाने, उसे अलग-अलग करने और कचरे को प्रोसेस करने की पूरी प्रक्रिया समझी।

टीम ने यह भी देखा कि इंदौर में कचरे को सिर्फ फेंका नहीं जाता, बल्कि कचरे को रीसायकल कर उसको उपयोग में भी लिया जाता है। कचरे से उपयोगी चीजें अलग कर उसको दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।

20 साल में तैयार किया स्वच्छता का सिस्टम
दिलीप घोष ने कहा कि जब देश में स्वच्छता की बात होती है तो इंदौर का नाम सबसे पहले आता है। इंदौर ने करीब 20 साल में अपनी सफाई व्यवस्था को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी इंदौर की व्यवस्था को समझकर इसे धीरे-धीरे लागू करने की कोशिश की जाएगी।

महापौर ने टीम को समझाया इंदौर का मॉडल
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बंगाल की टीम को इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था के बारे में प्रेजेंटेशन दिया। इसमें कचरा उठाने, कचरा अलग करने, उसकी प्रोसेसिंग और पूरे सिस्टम की निगरानी के बारे में जानकारी दी गई।

बंगाल की टीम ने माना कि इंदौर का स्वच्छता मॉडल देश के दूसरे शहरों के लिए भी सीखने लायक है।

 

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