इंदौर में रिंग रोड के विरोध में किसानों का अनोखा प्रदर्शन, टंकी और कंडे लेकर कलेक्टर चौराहे पर डटे

प्रस्तावित पूर्व-पश्चिम रिंग रोड और मनमाड़ रेल परियोजना के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। शुक्रवार को पूर्व-पश्चिम रिंग रोड किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर चौराहे पर एकत्र हुए और अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान किसान अपने साथ पानी की टंकियां, गोबर के कंडे, राशन और खाने-पीने का सामान लेकर पहुंचे। कई किसान परिवारों के साथ धरने पर बैठे, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे। किसानों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे।

किसानों की प्रमुख मांगों में प्रस्तावित पूर्वी आउटर रिंग रोड और मनमाड़ रेल परियोजना को निरस्त करना शामिल है। किसानों का कहना है कि यदि परियोजनाएं निरस्त नहीं की जाती हैं, तो उनका अलाइनमेंट वर्तमान प्रस्तावित मार्ग से 5 से 6 किलोमीटर दूर किया जाए ताकि कृषि भूमि और ग्रामीण आबादी पर कम प्रभाव पड़े।

इसके अलावा किसानों ने कृषि भूमि की खरीदी-बिक्री पर पिछले ढाई वर्षों से लगी रोक हटाने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि भूमि अधिग्रहण और प्रस्तावित परियोजनाओं के कारण किसान आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इंदौर के पूर्वी क्षेत्र में पहले से ही आरई-1, बायपास, आरई-2, आरई-3 और इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस हाईवे जैसी बड़ी सड़क परियोजनाएं मौजूद हैं। ऐसे में एक और रिंग रोड की आवश्यकता नहीं है। किसानों के अनुसार हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पहले ही विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है और नया रिंग रोड बनने से सैकड़ों किसान भूमिहीन हो सकते हैं।

किसानों ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी उनकी चिंताओं से सहमत हैं। सांसद शंकर लालवानी, सांसद कविता पाटीदार, सांसद सावित्री ठाकुर, विधायक उषा ठाकुर, विधायक मधु वर्मा तथा मंत्री तुलसीराम सिलावट कथित रूप से अलाइनमेंट में बदलाव की मांग को लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिख चुके हैं।

फिलहाल किसान कलेक्टर चौराहे पर धरने पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे चर्चा करने नहीं पहुंचा है। वहीं प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

किसानों का कहना है कि यह आंदोलन उनकी जमीन, आजीविका और भविष्य को बचाने की लड़ाई है और मांगें पूरी होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।

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