इंदौर में एमवाय अस्पताल में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला बेरियेट्रिक एवं मेटाबोलिक क्लिनिक, आयुष्मान योजना से होगा मोटापे का इलाज

बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान की आदतों के कारण देश में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंदौर के शासकीय महाराजा यशवंतराव (एमवाय) चिकित्सालय में मध्यप्रदेश के पहले बेरियेट्रिक एवं मेटाबोलिक क्लिनिक का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने कहा कि मोटापा अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है और हर तीसरा-चौथा व्यक्ति इससे प्रभावित है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. खाड़े ने कहा कि मोटापा कई अन्य बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं को जन्म देता है। उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से मोटापे का इलाज काफी महंगा होता है और इसमें 3 से 4 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में शासकीय अस्पताल में इस सुविधा की शुरुआत बड़ी राहत साबित होगी।
उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत मोटापे का उपचार और सर्जरी नि:शुल्क उपलब्ध होगी, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग के मरीजों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पहले यह समस्या केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन अब ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से बढ़ रही है।
महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि सर्जरी विभाग में मोटापे का इलाज पहले से किया जा रहा था, लेकिन अब नए क्लिनिक की शुरुआत से उपचार और तेज तथा व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। अस्पताल प्रशासन ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा कदम बताया।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों ने मोटापे से होने वाली बीमारियों और उसके दुष्प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर संभागायुक्त ने सर्जरी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक, विशेषज्ञ और नागरिक उपस्थित रहे।
मरीजों के अनुभव भी बने प्रेरणा
कार्यक्रम में मोटापे से उपचार पा चुके मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए। एक महिला मरीज ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत ऑपरेशन के बाद उनका वजन 103 किलोग्राम से घटकर 70 किलोग्राम हो गया, जिससे उन्हें कई बीमारियों से राहत मिली। वहीं खजराना क्षेत्र की एक अन्य महिला ने बताया कि सर्जरी के बाद उनका वजन 120 किलोग्राम से घटकर 97 किलोग्राम हो गया और स्वास्थ्य में काफी सुधार आया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही इलाज और जीवनशैली में सुधार से मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है। एमवाय अस्पताल में शुरू हुआ यह क्लिनिक प्रदेश में मोटापा उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।






