एचडीएफसी बैंक ने पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म नियुक्त की

देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank ने अपने पूर्व अंशकालिक चेयरमैन Atanu Chakraborty के इस्तीफे में उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए बाहरी विधि (लॉ) कंपनियों को नियुक्त किया है।
बैंक ने यह कदम निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है।
स्वतंत्र जांच के लिए बाहरी फर्म
एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने बताया कि बाहरी विधि कंपनियों की नियुक्ति एक सक्रिय पहल है, जिससे इस्तीफे में उठाए गए सभी मुद्दों की स्वतंत्र समीक्षा की जा सके।
उन्होंने कहा कि यह कदम बैंक के उच्च कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों के अनुरूप है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
अचानक इस्तीफे से उठे सवाल
पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए 18 मार्च से प्रभावी अपना इस्तीफा दे दिया था।
यह पहली बार है जब बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ा है, जिससे बैंक के कामकाज को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
इस्तीफे में क्या कहा गया?
अपने इस्तीफे में चक्रवर्ती ने लिखा था कि—
- पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं हुईं
- जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं
प्रशासनिक पृष्ठभूमि
अतनु चक्रवर्ती 1985 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और उन्होंने—
- आर्थिक मामलों के सचिव
- निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव
जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
विलय के दौरान बने थे चेयरमैन
वे उस समय चेयरमैन बने थे जब HDFC Ltd और HDFC Bank के बीच ऐतिहासिक रिवर्स मर्जर प्रक्रिया चल रही थी।
1 जुलाई 2023 को प्रभावी इस विलय के बाद करीब 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त बैलेंस शीट वाली विशाल वित्तीय इकाई का गठन हुआ।
बैंक की साख पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस जांच के जरिए बैंक अपनी साख और पारदर्शिता को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और बैंक आगे क्या कदम उठाता है।






