पूंजीगत व्यय से निर्माण उपकरण क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा, एचडी कुमारस्वामी ने बताई सरकार की रणनीति

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा है कि भारत के बढ़ते पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) से निर्माण उपकरण क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और देश वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में आयोजित छठे वार्षिक निर्माण उपकरण वित्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

सम्मेलन का विषय था — “एक लचीली अवसंरचना और निर्माण उपकरण वित्तपोषण इकोसिस्टम का निर्माण: वैश्विक पहुंच के लिए घरेलू निर्माण”। कुमारस्वामी ने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार यह विकास बुनियादी ढांचे के विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती और निरंतर पूंजी निवेश से संचालित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार केवल भौतिक संपत्तियों का निर्माण नहीं कर रही, बल्कि दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता विकसित करने पर भी फोकस कर रही है। भारी उद्योग मंत्रालय लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए निर्माण उपकरण इकोसिस्टम को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

कुमारस्वामी ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन किया गया है, जो सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस निवेश से आने वाले समय में राजमार्ग, रेलवे, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, बंदरगाह, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना और शहरी विस्तार जैसे क्षेत्रों को संरचनात्मक गति मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित निर्माण और अवसंरचना उपकरण (CIE) संवर्धन योजना का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च मूल्य और तकनीकी रूप से उन्नत उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इस पहल के जरिए देश के भीतर रणनीतिक क्षमता विकसित करने और भारतीय निर्माताओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

कुमारस्वामी के अनुसार, भारतीय निर्माण उपकरण बाजार का वर्तमान आकार करीब 9.5 अरब डॉलर है और वर्ष 2030 तक इसके दोगुने से अधिक होने की संभावना है। वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र में 1,40,000 से अधिक इकाइयों की बिक्री दर्ज की गई, जबकि दशक के अंत तक इसे 25 अरब डॉलर के बाजार में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के पूंजीगत निवेश और मजबूत वित्तपोषण संरचना के चलते निर्माण उपकरण क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत के औद्योगिक विकास का प्रमुख इंजन बन सकता है।

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