पेट्रोल, डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती, नई दरें 1 जून से होंगी लागू
केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का फैसला किया है। संशोधित दरें 1 जून से प्रभावी होंगी। इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और निर्यात क्षेत्र को राहत देना माना जा रहा है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का देश के भीतर पेट्रोल और डीजल खरीदने वाले आम उपभोक्ताओं पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
1 जून से लागू होंगी नई दरें
सरकारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल, डीजल और ATF पर लागू निर्यात शुल्क में संशोधन किया गया है। नई दरें 1 जून 2026 से लागू हो जाएंगी।
यह निर्णय वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय मांग और निर्यात बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्या होती है एक्सपोर्ट ड्यूटी?
एक्सपोर्ट ड्यूटी वह कर है जो किसी उत्पाद को विदेशों में निर्यात करने पर लगाया जाता है। सरकार समय-समय पर बाजार की स्थिति और राजस्व आवश्यकताओं के अनुसार इसमें बदलाव करती है।
जब एक्सपोर्ट ड्यूटी कम की जाती है तो निर्यातकों को कुछ राहत मिलती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर
विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल निर्यात किए जाने वाले ईंधन उत्पादों पर लागू होगा। भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें कई अन्य कारकों जैसे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, कर संरचना, परिवहन लागत और विपणन मार्जिन पर निर्भर करती हैं।
इसलिए एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का सीधा असर आम उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल पंपों पर चुकाई जाने वाली कीमतों पर नहीं पड़ेगा।
पेट्रोलियम कंपनियों को मिल सकती है राहत
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी में कमी से रिफाइनरी और पेट्रोलियम कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। ऐसे में ड्यूटी में कटौती से निर्यात कारोबार को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
ATF सेक्टर को भी मिलेगा फायदा
एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर ड्यूटी कम होने से विमानन ईंधन के निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है। इससे भारतीय रिफाइनरियों की वैश्विक बाजार में स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र पर रहेगी नजर
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मांग के आधार पर सरकार ईंधन से जुड़ी कर नीतियों में आगे भी बदलाव कर सकती है।
फिलहाल, एक्सपोर्ट ड्यूटी में यह कटौती भारतीय ऊर्जा और पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन कीमतों में किसी तत्काल बदलाव की संभावना नहीं है।






