पांच राज्यों में मकानों की गणना का फील्ड कार्य शुरू, 1.44 करोड़ परिवारों ने पूरी की स्व-गणना

देशव्यापी जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) का फील्ड कार्य पांच प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस चरण में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र, राजस्थान, मेघालय, महाराष्ट्र और झारखंड को शामिल किया गया है।
वहीं, डिजिटल जनगणना के तहत शुरू की गई स्व-गणना (Self Enumeration) सुविधा को देशभर में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। अब तक 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.44 करोड़ से अधिक परिवार ऑनलाइन माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी कर चुके हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है। वहीं, आज से गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में भी स्व-गणना की सुविधा शुरू हो गई है। यहां के निवासी 31 मई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल पर खुद को पंजीकृत कर सकेंगे। इसके बाद 1 जून से 30 जून 2026 तक फील्ड कार्य चलेगा।
इसी तरह उत्तर प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया 21 मई तक जारी रहेगी, जिसके बाद 22 मई से 20 जून 2026 तक मकान सूचीकरण का जमीनी कार्य किया जाएगा।
इससे पहले 16 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के एनडीएमसी एवं कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्रों में मकान सूचीकरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
देश के इतिहास में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए की जा रही है। इस प्रक्रिया में प्रगणक एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए डेटा संग्रह कर रहे हैं।
इस चरण के दौरान नागरिकों से 33 प्रश्नों वाली अधिसूचित प्रश्नावली के आधार पर जानकारी ली जा रही है। इसमें परिवार की आवासीय स्थिति, घर की मूलभूत सुविधाएं, संपत्तियों और परिवार से जुड़ी जानकारी शामिल है। सरकार का कहना है कि यह डेटा विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन में मददगार होगा।
जिन परिवारों ने ऑनलाइन माध्यम से स्व-गणना पूरी कर ली है, उन्हें एक विशिष्ट ‘स्व-गणना आईडी’ मिली है। सरकार ने नागरिकों से इसे सुरक्षित रखने और गणनाकर्ता के घर आने पर साझा करने की अपील की है।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत नागरिकों की सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और राष्ट्रीय विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा।






